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भाजपा नेता मंगल प्रभात लोढ़ा की कंपनी पर स्टाम्प शुल्क चुराने का आरोप, लगा 473 करोड़ का जुर्माना

मशहूर रियल एस्टेट कारोबारी लोढ़ा ग्रुप पर महाराष्ट्र सरकार के स्टाम्प एंड रजिस्ट्रेशन विभाग ने 5,700 करोड़ की जमीन की खरीद पर जानबूझकर स्टाम्प शुल्क नहीं देने को लेकर जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना विभाग ने सेंट्रल मुंबई के वडाला में खरीदे गए जमीन को लेकर लगाया है।

लोढ़ा ग्रुप का स्वामित्व भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल प्रभात लोढ़ा के परिवार के पास है।  बता दें कि 30 अप्रैल को महाराष्ट्र के कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने लोढ़ा ग्रुप को स्टाम्प शुल्क न जमा करने का दोषी पाते हुए समूह पर 473 करोड़ रुपये जुर्माना 30 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया।

उल्लेखनीय है कि भाजपा विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा कंपनी के चेयरमैन हैं और उनके बेटे अभिषेक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। अभिषेक ने मीडिया को बताया कि उनकी कंपनी इस आदेश को चुनौती देगी।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मंगल प्रभात लोढ़ा लोढ़ा ग्रुप ने मुंबई के वडाला में न्यू कफ परेड नाम की एक आवासीय और वाणिज्यिक टाउनशिप का निर्माण करा रहा है। यह प्रोजेक्ट कुल 9.96 लाख वर्गफीट पर फैला है। इस प्रोजेक्ट में करीब 1200 अपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं। इसी जमीन की खरीद के दौरान कंपनी पर स्टाम्प शुल्क नहीं जमा करने का आरोप है।

बताया जा रहा है यह विवाद मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) और लोढ़ा ग्रुप के लोढ़ा क्राउन बिल्डमार्ट प्राइवेट लिमिटेड के बीच है। इस विवादित जमीन के प्लानिंग का अधिकार एमएमआरडीए के पास है और 3 मार्च 2010 को अथॉरिटी ने इस जमीन पर निर्माण के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं।

एक अगस्त 2011 को एमएमआरडीए और लोढ़ा ग्रुप के बीच एक लीज समझौता हुआ था। समझौते के तहत लोढ़ा ग्रुप को इस जमीन पर बेयर लाइसेंस के तहत केवल इमारतें बनाने का अधिकार दिया गया था। इस जमीन पर तब तक कोई और निर्माण नहीं होना था जब तक कि लीज आधिकारिक तौर पर न दे दी दाए। इस बात पर दोनों पक्ष सहमत थे कि निर्माण पूरा होने पर आधिकारिक तौर पर लीज दी जाएगी।

कानूनी तौर पर लीज देने के वादे के दस्तावेज पर कोई स्टैंप शुल्क नहीं लगता है बशर्ते जमीन पर तुरंत कब्जा न दे दिया जाए और उस पर लीज लेने को लाभ पहुंचाने वाला निर्माण न हो जाए।

दूसरी तरफ कलेक्टर ऑफ स्टैंप्स मुताबिक, साल 2011 का दस्तावेज निर्माण कार्य की अनुमति का दस्तावेज है और इससे कंपनी को लाभ प्राप्ति की शुरुआत हो गई है। कलेक्टर ऑफ स्टैंप्स ने इस बात का संज्ञान लिया कि लोढ़ा ग्रुप इस प्रोजेक्ट के तहत पहले ही 1000 अपार्टमेंट बेच चुका है और उस पर लोन भी ले चुका है।

वहीं दूसरी तरफ कंपनी ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है जिसमें कोर्ट ने स्टैंप शुल्क आधिकारिक तौर पर लीज दिए जाने की बात कही थी। कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि वो इस फैसले को उच्च प्रशासनिक और न्यायिक मंच पर चुनौती देगी।

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