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भाजपा नोटबंदी को “एन्टी ब्लेक मनी डे” के बजाए “नोटबंदी माफी दिवस” के रुप में ही मनाए : मायावती

लखनऊ:  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा अति-जल्दबाजी में व काफी अपरिपक्व तरीके से 500 व 1,000 रूपये की नोटबन्दी करके अपने मुट्ठीभर चहेते नेताओं व उद्योगपतियों को छोड़कर देश की समस्त सवा सौ करोड़ ग़रीब, मज़दूर, किसान व अन्य मेहनतकश आमजनता के लिये यह अभूतपूर्व तंगी, जंजाल व बेरोजगारी आदि के गहरे संकट में डालने वाला फैसला साबित होने के कारण इस फैसले को भारत के इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुये बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने कहा कि मोदी सरकार की अन्य और भी मनमानी, अड़ियल व निरंकुश व्यवहार के कारण देश एक प्रकार से आपातकाल के संकटकालीन दौर से गुजर रहा है जिस परेशानी से मुक्ति प्राप्त करने के लिये लोगों को बीजेपी द्वारा फैलाई गई भावनाओं के मकड़जाल से मुक्त होना ज़रूरी है।

अपनी पार्टी व नेताओं का पूरा इंतज़ाम करने के बाद देश में “नोटबंदी” की् आर्थिक इमरजेन्सी लागू करके देश के हर वर्ग के लोगों को अभूतपूर्व गहरे संकट में डालने व इसके कारण देश में छायी आर्थिक मन्दी के कठिन दौर को एक वर्ष पूरा होने पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये उन्होंने आज एक बयान में कहा कि वैसे तो नोटबन्दी का फैसला दिखावटी तौर पर देशभर में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार व काला धन आदि को समाप्त करने के लिये लिया गया था, परन्तु इस वास्तविकता से कौन इन्कार कर सकता है कि देश की ग़रीब, मजदूर व मेहनतकश आमजनता इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है फिर भी इनको हर स्तर पर अधिकांशः प्रताड़ित व दण्डित करने वाला ’’सरकारी भ्रष्टाचार’’ किसी भी स्तर पर कम होने के बजाय काफी बढ़ा है।

वास्तव में बीजेपी एण्ड कम्पनी के जितने भी करीबी व ख़ास बड़े लोग हैं उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, गै़र-क़ानूनी व अनैतिक कार्यों का एक-के बाद-एक पर्दाफाश होते रहने से अब इस श्री नरेन्द्र मोदी सरकार का भ्रष्टाचार का भाण्डा भी लगातार फूटता जा रहा है और यह साबित होता जा रहा है कि इनके लाख दावे के बावजूद बीजेपी व मोदी सरकार भ्रष्टाचार के अभिशाप से मुक्त नहीं बल्कि भ्रष्टाचार से युक्त सरकार है। ’’पैराडाइज पेपर भाण्डाफोड़’’ व मीडिया द्वारा अन्य रहस्योद्घाटन इस बात को प्रमाणित करते हैं कि बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोग जनता को ठग रहे हैं तथा कम्बल ओढ़ कर घी पीने में माहिर हैं।

मायावती ने कहा कि भ्रष्टाचार व काला धन के अभिशाप से देश में सर्वसमाज के लोग काफी ज्यादा दुःखी व परेशान हैं लेकिन इससे छुटकारा मिलता हुआ कहीं नज़र नहीं आ रहा है बल्कि ’’नोटबन्दी’’ से तो अनेकों प्रकार के नये भ्रष्टाचार के श्रोतों का जन्म हुआ है जिसका भी लाभ बीजेपी एण्ड कम्पनी के करीबी व चहेते लोगों ने ही उठाया है जबकि आमजनता नोटबन्दी की चक्की में बुरी तरह से आजतक पिस रही है और नोटबन्दी की आर्थिक इमरजेन्सी व उसके फलस्वरुप देश में छायी मन्दी से उसका अपना जीवन भी नरक बनता जा रहा है।

बीएसपी ने ही इसके खिलाफ काफी तार्किक तौर से सबसे पहले अपनी आवाज़ संसद में व संसद के बाहर उठायी थी जो कि आज एक वर्ष बाद पूरी तरह से सही साबित हुआ है। साथ ही, नोटबन्दी के सम्बंध में सरकारी दावे एक के बाद एक पूरे तौर पर गलत व झूठे साबित होते जा रहे हैं। क्या बीजेपी व मोदी सरकार इसके लिये जनता से माफी माँगेगी? अतः इन सब बातों को ध्यान में रखकर अब बीजेपी को इसे (नोटबंदी) ‘‘एन्टी ब्लेक मनी डे‘‘ मनाने के स्थान पर इसको केवल ‘‘नोटबन्दी माफी दिवस‘‘ के रुप में ही मनाना चाहिये, तो यह ज्यादा बेहतर होगा।

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