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भाजपा शासित ध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रही बेरोजगारोंं की संख्‍या

पिछले तीन साल की अवधि के विभिन्न राज्यों में कराए गए सर्वेक्षण में सामने आया है कि मप्र में बेरोजगारी बढ़ने के साथ केंद्रीय योजनाओं का भी बुरा हाल है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की बात करें, तो पिछले तीन साल में मप्र को दो अरब दो करोड़ 93 लाख रुपए के फंडिंग के बाद भी रोजगार सिर्फ 43 हजार 713 लोगों को ही मिला। वर्ष 2015-16 में हुए वार्षिक सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश में बेराजगारी का प्रतिशत 3 रहा, जबकि वर्ष 2014-15 में 2.3 था। यानी एक साल में बेरोजगारी कम करने में सरकार विफल रही,जबकि इसी दौरान बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों में बेरोजगारी दर घट रही है।

मप्र में तीन साल में 43 हजार 713 लोगों को ही रोजगार मिल पाया है। हालांकि रोजगार मिलने वाले युवाओं की संख्या भी पिछले साल से कम हुई। वर्ष 2014-15 में ये 21 हजार से ज्यादा थी, तो वर्ष 2016-17 में अब तक सिर्फ 5 हजार 320 युवाओं को नौकरी मिल पाई।

नोटबंदी से आम आदमी पर मुसीबतोें का पहाड़ टूट पड़ने का आरोप लगाते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रभारी नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने दावा किया कि नरेेंद्र मोदी सरकार के इस कदम से सूबे में 28 प्रतिशत रोजगार घट गये हैं। बच्चन ने यहां संवाददाताओं से कहा, नोटबंदी ने आम आदमी के जीवन में कठिनाइयां बढ़ा दी हैं। हमारा अनुमान है कि सरकार के 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट बंद करने के निर्णय के बाद प्रदेश में 28 प्रतिशत रोजगार घट गये हैं। इसके साथ ही, पीथमपुर और मंडीदीप जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रोंं में हजारों मजदूरों की छंटनी कर दी गयी है।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के चलते सूबे के झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में अब भी नकदी की खासी किल्लत बनी हुई है, जिससे वहां के बाशिंदों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।बच्चन ने आरोप लगाया कि सरकार डिजिटल लेन-देन से जुड़ी चुनिंदा कम्पनियों को फायदा पहुुंचाने के लिये नकदी रहित अर्थव्यवस्था का जुमला उछाल रही है।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि प्रदेश में भाजपा नेताओं से जुड़े सहकारी बैंकों में नोटबंदी के बाद धड़ल्ले से नये खाते खोलकर बडे़ पैमाने पर काले धन को सफेद किया गया है। विधानसभा के प्रभारी नेता प्रतिपक्ष ने एक सवाल पर कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अगुवाई में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक से 11 दिसंबर को शुरू की गयी नर्मदा सेवा यात्रा के बहाने भाजपा को अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश नहीं करनी चाहिये।

उन्होंने कहा, नर्मदा सेवा यात्रा तभी सार्थक सिद्ध होगी, जब मुख्यमंत्री नर्मदा के किनारों पर चल रहे अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी रोक लगवाएंगे। इसके साथ ही, गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के कारण मध्यप्रदेश में विस्थापित हजारों लोगों के उचित पुनर्वास और रोजगार का इंतजाम किया जायेगा।

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