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भारतीय कंपनियों के लिए नासाज़गार हालात

नई दिल्ली: देश में औद्योगिक क्षेत्र के प्रदर्शन इस समय संतोषजनक नहीं है। इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लैंको इन्फ़्राटिक ने पिछले साल सितंबर में अपने विद्युत उत्पादन व्यापार का एक हिस्सा बेचने का प्रस्ताव किया था ताकि कर्ज़‌ भुगतान में मदद मिल सके। इस घोषणा के आठ महीने बाद भी अब तक कोई मझमलत न हो सकी।

इसी तरह की कई कंपनियां अपने संपत्ति बेचने का प्रस्ताव रखती हैं लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका। कर्ज़‌ के बोझ से पीड़ित कंपनियों के लिए ब्याज भुगतान एक चुनौतीपूर्ण है। और उनके पास अपनी संपत्ति की बिक्री से ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है लेकिन प्रयासों के बावजूद यह संपत्ति खरीदने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है।

पिछले साल अप्रैल से अब तक विभिन्न कंपनियों ने 82,343 करोड़ रुपये मालियती संपत्ति की बिक्री से संबंधित 23 मझमलतों की घोषणा लेकिन इनमें केवल चार मझमलतें ही पूरी हो सकें जिनकी मझमलत 2,546 करोड़ रुपये बताई गई है .14 मझमलतें अब तक आभरतसफया हैं जबकि 12 अभी तक सटीकता नहीं दिया गया। यह नकारात्मक प्रवृत्ति भारतीय कंपनियों के लिए बेहद निराशाजनक साबित हो रहा है।

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