Thursday , December 14 2017

भारतीय रेल व्यवस्था की बदहाली, नाश्ता से 26 लोग बीमार

नई दिल्ली। भारतीय रेल व्यवस्था काफी सालों से बदहाली का शिकार होते आई है| इसमें कोई नई बात नहीं है| रेल का पटरी से उतर जाना, ट्रेनों में सही खाना न मिलना, या फिर ट्रेनों में टॉयलेट की बदहाल व्यवस्था|

ये सारी समस्या लम्बे अरसे से होती अ रही हैं| इनकी सुधार व्यवस्था में कोई व्यवस्था नहीं है हाँ योजनायें कागजों पर बहुत आ रही हैं| लेकिन हक़ीकी तौर पर कुछ नहीं हुआ| बस दिन ब दिन नए हादसा नई समस्या सामने अ रही हैं| हम कुछ कर भी नहीं पर रहे बस देख लेते हैं और आत्ममंथन के साथ चिंतन कर लेते है|

साथ ही सरकार को बुरा भला कह देते हैं उसके बाद फिर अगले हादसे का इंतज़ार| ऐसा ही एक हादसा सामने आया है यात्रियों को वीआईपी सुविधा और शानदार खाना देने का दावा करने वाले तेजस एक्सप्रेस में एक भारी चूक हुई है। रविवार (15 अक्टूबर) को करमाली-सीएसटी तेजस एक्सप्रेस में पैंट्री कार का नाश्ता खाकर 26 यात्री बीमार हो गये। इनमें से 3 यात्रियों की हालत बेहद गंभीर है। इन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है।

आईआरसीटीसी के अधिकारी के मुताबिक यात्रियों को वेज और नॉन वेज दोनों तरह का खाना दिया गया था। लेकिन गड़बड़ी किस खाने में है ये अबतक पता नहीं चल पाया है। इसकी जांच चलती रहेगी सालों गुज़र जायंगे कुछ पता नहीं चलेगा| अगर पता भी चल गया तो कुछ होगा नहीं|

आईआरसीटीसी के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रेन में सवार सभी 290 यात्रियों को नाश्ता दिया दिया गया था| दोपहर 12 बजे के लगभग तीन यात्रियों ने शिकायत की कि उन्हें बेचैनी लग रही है और उन्हें उल्टी आ रही ही है, कुछ ही देर में दूसरे यात्रियों ने भी ऐसी ही शिकायत की।’ बता दें कि ट्रेनों में खाना और नाश्ता आईआरसीटीसी के वेंडर परोसते हैं। आईआरसीटीसी टेंडर द्वारा इनका चयन करती है।

इस घटना के बाद मुंबई पैसेंजर्स के रिश्तेदार बेहद नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि प्रीमियम ट्रेन होने का दावा करने और इतना महंगा किराया लेने के बावजूद रेलवे की ओर से लापरवाही की जा रही है। ये आरामदायक यात्रा के रेलवे के दावे पर सवाल खड़ा करता है।

पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 22मई को देश की पहली हाईस्पीड और सुविधाओं से युक्त रेलगाड़ी तेजस एक्सप्रेस को मुंबई के छत्रपति शिवाजी स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह नई प्रीमियम रेलगाड़ी मुंबई से गोवा के करमाली के बीच सप्ताह में पांच दिन चलती है।

यह रेलगाड़ी 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकती है।
इसमें ऑटोमेटिक दरवाजे, वाईफाई और एलसीडी स्क्रीन हैं। साथ ही इसमें टचलेस वॉटर टैप, वॉटर लेवल इंडीकेटर और हैंड ड्रायर भी हैं। सभी डिब्बों में बॉयो वैक्युम टॉयलेट भी है। जहाँ तक मैं समझता हूँ इतनी सारी सुविधाएँ सब बेमानी सी लगती हैं अगर उसमे बुनियादी चीजें न दुरुस्त हों|

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