भारत की पहली महिला मर्चेंट नेवी कैप्टन राधिका मेनन को मिला बहादुरी का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

भारत की पहली महिला मर्चेंट नेवी कैप्टन राधिका मेनन को मिला बहादुरी का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार
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लंदन: भारत की पहली महिला मर्चेंट नेवी कैप्टन राधिका मेनन को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्हें यह पुरस्कार पिछले साल बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने गए भारत के सात मछुआरों को बचाने के लिए उनके बहादुरी के लिए दिया गया है। मेनन भारत की पहली महिला हैं जिन्हें यह पुरस्कार दिया गया है।

उन्होंने लंदन के आईएमओ के मुख्यालय में एक पुरस्कार समारोह के दौरान अपना पदक और प्रमाणपत्र ग्रहण किया। पुरस्कार ग्रहण करने के बाद मेनन ने कहा कि अपने और अपनी टीम के लिए इस सम्मान से मैं गौरवान्वित महूसस कर रही हूं। मुश्किल में फंसे लोगों की मदद करना नाविक का कर्तव्य है। मैंने अपना कर्तव्य पूरा किया। नाविक का काम एक महान पेशा है जो विश्व व्यापार एवं अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक एकीकरण में भारी योगदान देता है। यह पहचान का हकदार है लेकिन उसे हमेशा यह मिल नहीं पाता।

मेनन आईएमओ की तरफ से बहादुरी का पुरस्कार ग्रहण करने वाली पहली महिला हैं जिन्हें भारत सरकार ने नामित किया था। यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर उन लोगों को दिया जाता है जो अपनी जान की बाजी लगाकर असाधारण बहादुरी दिखाते हैं।

मेनन ने जून, 2015 को अशांत बंगलादेश में एक नौका के सात मछुआरों को सफलतापूर्वक बचाया था। आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा से ओडिशा के गोपालपुर जा रही मछुआरों की नौका दुरगम्मा समुद्री तूफान में फंस गई। उसका इंजन भी खराब हो गया। मेनन उस बचाव दल की कैपटन थी।

 

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