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भारत के बैंकों का फंसा हुआ कर्ज 9.5 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर

नई दिल्ली : एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था फंसे हुए कर्ज को नियंत्रण में लाने के करीब नहीं है।  सूचना के अधिकार के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) से प्राप्त आंकड़ों की समीक्षा से पता चलता है कि बैंकों का कुल फंसा हुआ कर्ज 6 महीनों में 4.5 प्रतिशत बढ़ा है। इससे पहले के 6 महीनों में यह 5.8 प्रतिशत बढ़ा था इस प्रकार बैंकों का फंसा हुआ कर्ज 9.5 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

आर.बी.आई. के आंकड़ों के मुताबिक जून अंत तक कुल कर्ज का प्रतिशत 12.5 है जो 15 साल में उच्चतम स्तर है। बैंकों और सरकार के लिए इस मुद्दे का एक हिस्सा एक सख्त प्रावधान व्यवस्था है। आर.बी.आई. चाहता है कि बैंकों को दिवालियापन कार्रवाई के लिए ली गई कंपनियों को कम से कम 50 प्रतिशत सुरक्षित ऋण और असुरक्षित भाग के लिए 100 प्रतिशत प्रदान करना है। इस तरह के सबसे बड़े मामलों में से करीब एक दर्जन लगभग करीब 1.78 लाख करोड़ रुपए या कुल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का एक-चौथाई है। 20 से अधिक अन्य बड़ी कंपनियां जोखिम का शिकार हैं जिनका दिवालियापन के लिए केस अदालत में है।

भारत में कंपनियों के वित्तपोषण के मुख्य स्रोत बैंक बने हुए हैं। ऐसे में फंसे हुए कर्ज की समस्या से बैंकों का मुनाफा खत्म हो रहा है और नए कर्ज की राह कठिन हो गई है। खासकर छोटी फर्मों को ऐसे समय में कर्ज नहीं मिल पा रहा है, जब अर्थव्यवस्था उनकी वजह से सुस्त हुई है। अप्रैल-जून में भारत की वृद्धि दर 3 साल में सबसे सुस्त रही है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के लिए चिंता का विषय है। सरकार को 2019 में आम चुनाव का सामना करना है और उससे पहले लाखों की संख्या में नई नौकरियों का सृजन करना है। बैंक अब प्रावधानों के मुताबिक डिफाल्टरों को दिवालिया घोषित कर रहे हैं। साथ ही केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों मेंं कटौती के बाद उसे वाणिज्यिक बैंकों तक लागू करने के नए नियमों से मुनाफे में भविष्य में और कमी आने की संभावना है।

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