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भारत में न्याय व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी, निचली अदालत में 5111 जज कम

नई दिल्ली। भारत में न्याय व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। अदालतों पर बोझ इतना ज्यादा है कि काम नहीं हो पा रहा है। देश में करीब तीन करोड़ मुकदमे लंबित हैं और सुनवाई के लिए जज नहीं हैं। भारत में न्याय व्यवस्था की हालत कितनी जर्जर है इसका अंदाजा लगाने के लिए यह एक आंकड़ा ही काफी है। निचली अदालतों में पांच हजार जजों की कमी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट और देश के 24 हाई कोर्ट्स की हालत भी कोई अच्छी नहीं है और वहां भी जजों की कमी की बात होती रहती है लेकिन निचली अदालतें किसी भी देश में न्याय व्यवस्था की रीढ़ होती हैं और वहां हालत और ज्यादा बुरी है।

कानून मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश की निचली अदालतों में 5,111 अधिकारियों की कमी पड़ रही है। 30 जून तक के ये आंकड़े बताते हैं कि निचली अदालतों के लिए 21,303 जजों की नियुक्ति की इजाजत दी गई है लेकिन अभी 16 हजार 192 पदों पर ही अधिकारी काम कर रहे हैं। ज्यादातर राज्यों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति हाई कोर्ट करता है। इसके अलावा 11 राज्यों में निचली अदालतों के जज हाई कोर्ट नियुक्त करता है जबकि 17 राज्यों में इन्हें पब्लिक सर्विस कमिशन के जरिए चुनते हैं।

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