भारत में मुसलमानों को खतरे के रूप में दिखाने की कोशिश हो रही है- अभिजीत बैनर्जी

भारत में मुसलमानों को खतरे के रूप में दिखाने की कोशिश हो रही है- अभिजीत बैनर्जी

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजित बैनर्जी का कहना है कि भारत में मुसलमानों को खतरे के रूप में दिखाने की कोशिश हो रही है। मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर ने कहा कि सत्ताधारी दल से जुड़े लोग मुस्लिमों की जनसंख्या के मुद्दे को उठा रहे हैं।

यह वास्तव में उनकी जनसंख्या को खतरनाक दिखाने की कोशिश हो रही है। टेलीग्राफ की खबर के अनुसार कोलकाता में लिटरेरी फेस्टिवल में बैनर्जी ने कहा कि मैं नहीं समझता हूं कि ऐसा कोई डर है कि मुस्लिम वाकई में भारत पर कब्जा कर लेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत और अमेरिका बिल्कुल महत्वपूर्ण रूप से समान हैं।

बैनर्जी ने कहा कि अल्पसंख्यक वास्तव में अल्पसंख्यक हैं। ये लोग बिल्कुल भी हावी होने के करीब नहीं है। ऐसे में अल्पसंख्यकों के बारे में अपने आसपास होने वाली बातों को लेकर सजग होने की जरूरत है। भाजपा से जुड़े लोग मुस्लिमों की आबादी को लेकर बात कर रहे हैं। अमेरिका में जो स्थिति अफ्रीकी अमेरिकियों और मेक्सिको के लोगों की है उसी तरह अल्पसंख्यक तुलनात्मक तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और शैक्षिक रूप से वंचित हैं।

उन्होंने कहा कि जब भी डर की बात की जाती है, तब आपको यह अनुमान लगाना चाहिए कि यह उस संदर्भ में होता है जब दो बराबरी के लोग एक दूसरे के मुकाबले में होते हैं। आपको यह चिंता हो सकती है कि दूसरा समूह भी शक्तिशाली है। यहां यह सच्चाई नहीं है। यह एक बनाई गई धारणा है जिसका हकीकत से कोई संबंध नहीं है।

नोबेल विजेता ने कहा कि मैं नहीं समझता कि वास्तव में कोई डर या खतरा है कि मुस्लिम भारत पर पूरी तरह से हावी हो जाएंगे। विस्थापन के मुद्दे पर बैनर्जी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में स्टडी करने वालों लोगों की यह हमेशा चिंता रही हैं कि भारत एक धीमी विस्थापन वाली अर्थव्यवस्था है… विस्थापन का बड़ा कारक आपदा (वैश्विक) है।

ऐसे में आप देख सकते हैं कि ईराक, सीरिया, वेनेजुएला दुनिया में विस्थापन कर रहे हैं। ये गरीब देश नहीं हैं। यह मध्य आय वाले देश हैं जो गृहयुद्ध से जूझ रहे हैं। यहां पूरी तरह से आर्थिक आपदा की स्थिति हैं।

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