भारत में रहने वाले सभी लोग हिन्दू- मोहन भागवत

भारत में रहने वाले सभी लोग हिन्दू- मोहन भागवत
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि संघ अंतरजातीय विवाह के खिलाफ नहीं है और यह पुरुष व महिला के बीच तालमेल का मुद्दा है. अंतरजातीय विवाह, शिक्षा और जातीय व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अनेक सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने कहा कि अगर अंतरजातीय विवाहों की गिनती करा ली जाए तो उनमें अधिकतम मामले संघ से होंगे.

संघ के तीन दिवसीय सम्मेलन को अंतिम दिन संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में नई शिक्षा नीति की जरूरत है. भागवत ने इस दौरान हिंदुत्व को लेकर भी अपने विचार लोगों के सामने रखे. उन्होंने कहा कि सभी पंथों के साथ तालमेल करना ही हिंदुत्व की विचारधारा है.

पहला अंतरजातीय विवाह 1942 में 

भागवत ने कहा, देश में पहले अंतरजातीय विवाह का मामला 1942 में महाराष्ट्र में सामने आया था. इसके लिए बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई थी बधाई देने वालों में बाबा साहेब अंबेडकर और श्री गुरुजी भी थे. गुरुजी ने कहा था कि आप सिर्फ शारीरिक आकर्षण के लिए शादी नहीं कर रहे बल्कि आप ये संदेश देना चाहते हैं कि हर कोई समान है.

हिंदुत्व के मु्द्दे पर संघ प्रमुख ने कहा, अन्य मतपंथों के साथ तालमेल करने वाली एकमात्र विचारधारा ये भारत की विचारधारा है, हिंदुत्व की विचारधारा है. पहचान की दृष्टि से, राष्ट्रीयता की दृष्टि से भारत में रहने वाले सबलोग हिंदू ही हैं.

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