Wednesday , August 15 2018

भीड़ का सबसे आसान शिकार हैं मुसलमान

मॉब लिंचिंग का अर्थ है भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दिया जाना, अमेरिका के बहुत से राज्यों में भीड़ों द्वारा की जाने वाली हत्याओं का एक लंबा इतिहास रहा हैं जिसे लिंचिंग कहा गया अमेरिकी गृह युद्ध के खत्म होने के बाद जैसे ही कालों को बराबरी के अधिकार मिले वैसे ही गोरों ने कालों की लिंचिंग्स शुरू कर दी थीं.

जर्मनी में यहूदियों के खिलाफ ‘लिंच मॉब्स’ के मनोवैज्ञानिक व्यवहार पर बहुत सारी रिसर्च की गई। तब के मनोवैज्ञानिकों का कहना रहा कि इस तरह की तमाम हत्याओं के पीछे नित्य पैदा की गई सामूहिक घृणा का हाथ था.

चर्चित मनोविश्लेषक जी ली बॉन ने 19वीं सदी के अंत में लिखी अपनी प्रसिद्ध किताब ‘द क्राउड’ में लिखा है कि किसी एक व्यक्ति के मुक़ाबले भीड़ का व्यवहार पूरी तरह अलहदा होता है। उनके मुताबिक़ “भीड़ में शामिल लोग किसी भी तरह के हों,सच्चाई ये है कि वो भीड़ का हिस्सा बन चुके हैं. लिहाजा उनके सोचने-समझने की दिशा सामूहिकता के साथ जुड़ जाती है। यही सामूहिकता तय करती है कि वह व्यक्ति किस तरह सोचेगा, महसूस करेगा और किसी ख़ास परिस्थिति में किस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा.”

‘भीड़ की बौद्धिकता भीड़ से अलग एक व्यक्ति की बौद्धिकता से कमतर होती है क्योंकि भीड़ तार्किक तरीके से सोचने में सक्षम नहीं हो पाती। भीड़ हमेशा मौक़े के मुताबिक़ रिएक्ट करती है.’

आज जब यह माना जा रहा कि आधुनिक मानव सभ्य बन रहा है भारत मे भीड़ असभ्य ओर हिंसक होती जा रही है आज ये भीड़ स्वयं को बहुसंख्यक लोकतंत्र के एक हिस्से के तौर पर दिखती है जहां वह ख़ुद ही क़ानून का काम करती है, खाने से लेकर पहनने तक सब पर उसका नियंत्रण होता है.

भीड़ को पता है कि गाली गलौज करने वालो को देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फॉलो करते है भीड़ को पता है कि केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिह आरोपियों के घर जाकर आंसू बहाते है , भीड़ को पता है कि केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा जमानत पर छुटे आरोपियों को माला पहना कर स्वागत करता है भीड़ को पता है कि अख़लाक़ की हत्या में शामिल लोगों को NTPC में नॉकरी दिलवा दी जाती है , भीड़ का नेतृत्व करने वाले जानते हैं कि बड़े नेताओं मंत्रियों की निगाह में चढ़ने का यही साधन है.

भारत मे भीड़ का सबसे आसान शिकार मुसलमान है वैसे ऐसा भी नही है कि सिर्फ मुसलमान ही इस मोब लिंचिंग का शिकार हो रहे हैं असम में किसी दूरस्थ गांव में बसे मुम्बई के 2 साउंड इंजीनियर को बच्चा चोर बता कर मार डाला गया, लेकिन 2017 में आयी इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट बताती हैं कि मुसलमान भीड़ का सबसे आसान शिकार होते हैं और वही सबसे पहले निशाना बनते है.

देवी प्रसाद मिश्र की एक कविता है –
‘हसन नाम जानलेवा हो सकता हैं
अमृत यह नाम भी निरापद नहीं रहा
बहुत सुरक्षित नहीं हैं आप
महंगू नाम के साथ
बलबीर सिंह नाम के ख़तरे तमाम हैं
इस तंत्र में सिर्फ आपका नाम
आपकी हत्‍या का सबब हो सकता है’

साभार- sabrangindia.in

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