भीड़ हत्या रोकने के लिए मोदी सरकार आईपीसी में कर सकती है बदलाव

भीड़ हत्या रोकने के लिए मोदी सरकार आईपीसी में कर सकती है बदलाव

केंद्र सरकार मॉब लिंचिंग को दंडनीय अपराध के तौर पर परिभाषित करने के लिए आईपीसी में संशोधन की संभावनाओं पर विचार कर रही है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी. अधिकारी ने बताया कि एक मॉडल कानून का मसौदा तैयार करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकारें भीड़ हत्या की घटनाएं रोकने के लिए अपना सकें.

 

बता दें कि बीते शुक्रवार को राजस्थान के अलवर में गोतस्करी के शक में हरियाणा के अकबर खान की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. इसके बाद सियासी दलों के बीच- आरोप प्रत्यारोप भी लगाए गए. इस घटना पर अधिकांश नेताओं ने अपनी नाराजगी जताई और कड़ी कार्रवाई की बात की.

भारतीय दंड संहिता में बदलाव के जरिए भीड़ द्वारा की जाने वाली हत्याओं को रोकने के संबंध में अधिकारी ने कहा, ”सबकुछ शुरूआती चरण में है, क्योंकि केंद्र को नया कानून बनाने को कहने वाले सुप्रीम कोर्ट के समूचे आदेश का परीक्षण करने की आवश्यकता है.”

यदि आईपीसी में संशोधन किया जाता है तो सरकार को भीड़ हत्या पर अलग से कोई कानून बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. अधिकारी ने कहा कि यदि खुद को निर्दोष साबित करने का जिम्मा आरोपी पर डाल दिया जाता है तो सीआरपीसी एवं भारतीय साक्ष्य कानून की कुछ धाराओं में भी संशोधन करने की जरूरत होगी.

उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर अपना रुख तय करने में कई दिन लग सकते हैं. सरकार सोशल मीडिया से जुड़ी रूपरेखा को भी ठोस बना सकती है ताकि ऐसी घटनाओं की वजह बनने वाली अफवाहों पर लगाम सुनिश्चित की जा सके.

हाल ही के महीनों में भीड़ द्वारा पीट – पीटकर लोगों की हत्या कर दिए जाने के कई मामले देश भर से सामने आए हैं. ताजा घटना राजस्थान में हुई जहां बीते शुक्रवार को गौ तस्करी के संदेह पर भीड़ ने एक शख्स की पीट – पीटकर हत्या कर दी.

भारत में भीड़ हत्या की बढ़ती घटनाओं की निंदा करते हुए सुप्रीमकोर्ट ने बीते मंगलवार को सरकार से कहा था कि वह ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानून बनाए. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने भीड़ हत्या की घटनाओं को भीड़तंत्र का भयावह कृत्य करार दिया था.

 

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