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भैंसे खोजने वाली यूपी पुलिस कातिल दरोगा से दूर क्यों..?

यूपी पुलिस का तरीकाकार दो ज़िलो में कितना अलग -अलग हो सकता है, यह हम आपको बताने जा रहे हैं| गुजश्ता 27 जनवरी को मुरादाबाद में पुलिस पर सर्राफ सत्येन्द्र का कत्ल कर लाश को पड़ोसी जिले रामपुर में फेंकने का इल्ज़ाम लगा था | इसके साथ ही मुराद

यूपी पुलिस का तरीकाकार दो ज़िलो में कितना अलग -अलग हो सकता है, यह हम आपको बताने जा रहे हैं| गुजश्ता 27 जनवरी को मुरादाबाद में पुलिस पर सर्राफ सत्येन्द्र का कत्ल कर लाश को पड़ोसी जिले रामपुर में फेंकने का इल्ज़ाम लगा था | इसके साथ ही मुरादाबाद में एक मुस्लिम नौजवान का कत्ल हुआ और उसका इल्ज़ाम भी मुरादाबाद पुलिस के सिर ही आया| हालांकि सिर्फ सर्राफ कत्ल केस में मुल्ज़िम पुलिस अहलकार की पहचान कर पाई | जिसके बाद मुल्ज़िम दरोगा 4 सिपाहियों के साथ फरार हो गया|

लेकिन पुलिस अभी तक इस मामले में सिर्फ दो सिपाहियों को ही गिरफ्तार कर सकी है, जबकि मुल्ज़िम दरोगा व उसका एक साथी सिपाही फरार है| वहीँ सरहदी ज़िला रामपुर है जहां की चौकन्नी और मुस्तैद पुलिस ने 1 फरवरी को चोरी हुईं वज़ीर आज़म खान की सातों भैंसों को 24 घंटे में खोज निकला |

मिली खबर के मुताबिक मुरादाबार शहर के सर्राफ सत्येन्द्र की 27 जनवरी को मुश्तबा हालातों में लापता हो गया था। दूसरे दिन उसकी लाश सरहदी जिले रामपुर के सुरजनपुर गांव से उसकी लाश मिलने के बाद पूरे मामले में सामने आई पुलिस के किरदार के बाद से शहरी कारोबारियों में मुल्ज़िम पुलिसअहलकारों की गिरफ्तारी को लेकर एहतिजाज़ी मुज़ाहिरा हुआ था।

वहीं दूसरी ओर 27 जनवरी को मुरादाबाद क्लब के बाहर ज़ख्मी हालत में मिले मुस्लिम नौजवान ने इलाज के दौरान दो दिन बाद दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान खुलासा हुआ कि नौजवान को दो गोलियां लगीं थी। पोस्टमार्टम में निकली गोलियां थ्री नॉट थ्री बोर की रायफल की निकली। जोकि पुलिस की रायफल में इस्तेमाल की जातीं हैं। पोस्टमार्ट रिपोर्ट आने के बाद इस नौजवान के कत्ल ला इल्ज़ाम भी पुलिस के ऊपर आ गया है।

आपको बता दें कि सत्येन्द्र सर्राफ के कत्ल के मामले में सुरजनपुर गांव के कुछ बच्चों ने पुलिस जीप को गांव तक आते और लाश को फेंकते हुए देखा था। जाँच में जीप मूंढापांडे के साबिक थाना इंचार्ज सैयद मंसूर आबिद की होने की तस्दीक की गई थी | गिरफ्तारी के डर से थाना इंचार्ज हमराह ड्राइवर समेत फरार हो गया है। सभी के मोबाइल भी बंद आ रहे हैं। उन्हें लाश को फेंकने का गुनाहगार माना गया है।

वहीं, कत्ल के खुलासे की सिम्त में पुलिस अभी खाली हाथ है। पुलिस की चारों टीमों को कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। मूंढापांडे थाना इंचार्ज सैयद मंसूर आबिद को सस्पेंड कर दिया गया था। जांच रिपोर्ट एसपी देहात एके सिंह ने एसएसपी आशुतोष कुमार को सौंप दी है।

इसमें थाना पुलिस के उस इलाके में जाने की तस्दीक हुई है, लिहाजा उन्होंने पुलिस को सुबूतो की बुनियाद पर मुजरिम माना है। एसएसपी ने थाना इंचार्ज के साथ गए ड्राइवर अमरपाल, सिपाही राहुल, अमित समेत चार को सस्पेंड कर दिया। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सभी को सुबूत मिटाने का मुल्ज़िम भी बनाया जाएगा।

अब बात करते हैं मुरादाबाद के पडोसी जिले रामपुर वाले मुगले आज़म यानी आज़म खां की…. जनाब की कुछ भैसों को चोर चुरा ले गए थे| जैसे ही ये बात पुलिस और इंतेज़ामिया में बैठे बड़े अफसरों को पता चला सभी सिर के बल वज़ीर के तबेले पहुँच गए| पैदल ही पास के जंगल तक जानवरों के पैरों के निशान का पीछा भी किया| तीन थानो की पुलिस लगा दी गयी भैंसों की तलाश में|

डीएम के हुक्म पर एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, लेखपाल स्लाटर हाउस और मीट फैक्ट्रियों के चक्कर लगाते रहे। पुलिस जानवरों के तस्करों से पूछताछ करती रही। कुछ भी हाथ नहीं लगता दिख जिलेके सभी अफसरों को अपना मुस्तकबिल तारीकी में नजर आने लगा था| लेकिन तवार की सुबह इन सभी के लिए नयी रौशनी लेकर आयी और पुलिस ने भैंसों को बरामद कर लिया।

इसके बाद सभी ने चैन की साँस ली| लेकिन एसपी ने रात के में लापरवाही की वजह मानते हुए दरोगा सुनील कुमार सहित सिपाही अजय कुमार और विपिन कुमार को लाइन हाजिर कर दिया है|

वहीँ इन दो कत्ल को एक हफ्ता बीत चुका है लेकिन मुल्ज़िम अभी भी कानून की पहुँच से कोसों दूर हैं| हों भी क्यों न ये मामला किसी वज़ीर या रसूखदार से जुड़ा तो नहीं है जिसके लिए वर्दीवालों को सजा का खौफ हो|

बहरहाल हमारा तो यही कहना है कि इन दो कत्ल में शामिल रहे पुलिस अहलकारो को जल्द से जल्द पकड़ कर उन्हें सजा दी जाये और आवाम को पैगाम दिया जाये कि यूपी पुलिस सिर्फ भैंस ही नहीं कातिलो को भी खोज सकती है|

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