Wednesday , December 13 2017

भोपाल एनकाउंटर: स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग टीम ने उठाये कई सवाल

नई दिल्ली: मंगलवार को एक स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग टीम ने पिछले महीने हुयी भोपाल मुठभेड़, जिसमें भोपाल जेल सिमी के आठ कार्यकर्त्ता मारे गए थे, पर अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट ने घटना के सरकारी संस्करण पर कई सवाल खड़े किये हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भोपाल जेल से भाग निकलना असंभव था और इस रिपोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में सामने आई खामियों पर भी प्रकाश डाला है। इस रिपोर्ट के ज़ारी करने के मौके पर बोलते हुए क्विल फाउंडेशन के विपुल कुमार और एनसीएचआरओ के अंसार इन्दोरी, जो इस टीम के सदस्य भी थे, ने इस रिपोर्ट में उठाये गए महत्वपूर्ण मुद्दों को सबके सामने रखा।

प्रशासन की तरफ से भोपाल जेल का दौरा करने की इजाज़त न मिलने के बाद, टीम ने ज़मानत पर बाहर आये एक विचाराधीन कैदी से राब्ता कायम किया। यह कैदी जेल से फरारी की घटना से सिर्फ एक हफ्ता पहले ही ज़मानत पर बाहर आया था। इस व्यक्ति के द्वारा दी गयी सूचना के आधार पर टीम ने दावा किया कि जेल में गार्डों से छिप कर भाग निकलना असंभव है।

टीम ने मुठभेड़ वाली जगह का भी मुआयना किया। टीम के मुताबिक मृतकों के शरीर के निशान को देख कर लगता है कि कैदी एक दुसरे के साथ खड़े थे और यह बात इस घटना के सरकारी संस्करण से बिलकुल भिन्न है। टीम ने निष्कर्ष निकाला वहां केवल तीन संभावनाएं हो सकती हैं: पहली, या तो कैदी एक साथ आत्मसमर्पण की पेशकश कर रहे थे, दूसरी, या वे एक साथ हमला बोलने की चुनौती दे रहे थे, या तीसरी, उनका कहीं और एनकाउंटर करके वहां लाया गया था।

टीम ने कई प्रत्यक्षदर्शियों से भी बात चीत की और पाया कि उनके बयान में घटना के वक़्त और इस्तेमाल किये गए हथियारों से जुड़ी कई विसंगतियां है।

टीम ने इस घटना में शहीद होने वाले सिपाही के परिजनों से भी मुलाक़ात की। लेकिन उन लोगों ने घटना के सरकारी संस्करण पर कोई सवाल नहीं उठाया क्योंकि उन्हें कथित तौर पर धमकियाँ मिल रही हैं।

इस टीम में अशोक कुमारी (दिल्ली विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर), अंसार इन्दोरी (एनसीएचआरओ), हिशाम (सॉलिडेरिटी यूथ मूवमेंट, केरल), एम् एच बन्ना (वरिष्ठ पत्रकार, मध्यमम दैनिक), सलमान (क्रिमिनोलॉजी जस्टिस-फेलो, टीआईएसएस) , स्वाति गुप्ता (बस्तर सॉलिडेरिटी नेटवर्क), सूर्या घिल्दयाल (रिसर्च एसोसिएट, क्विल फाउंडेशन) तिमिषा दाधीच (एमए क्रिमिनोलॉजी एंड जस्टिस, टीआईएसएस) और विपुल कुमार, शोधकर्ता, क्विल फाउंडेशन शामिल थे।

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