Friday , December 15 2017

भोपाल एनकाउन्टर: जाँच की मांग कर रहे पूर्व एडवोकेट जनरल को पुलिस ने किया नज़रबंद

इंदौर(मप्र ) : सिमी मुठभेड़ के विरोध में भोपाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे पूर्व एडवोकेट जनरल आनंद मोहन माथुर को शनिवार को घर में नजरबंद किये जाने के विरोध में कई वकील और कार्यकर्ताओं समर्थन में आ गये हैं |

भोपाल  मुठभेड़ के ख़िलाफ़ भोपाल में शनिवार शाम को रीगल चौक  विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था | लेकिन प्रदर्शन स्थल पर पहुँचने से पहले ही माथुर के अलावा, कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया|  प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन स्थल से प्रदर्शनकारियों को भगाने में पुलिस फ़ोर्स के अलावा कथित तौर दक्षिणपंथी कार्यकर्ता भी शामिल थे| कार्यकर्ताओं ने पुलिस के  इस कृत्य की निंदा करते हुए इसकी तुलना आपातकाल के दिनों से की जब सरकार की किसी भी कार्यवाई के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर बैन था |

वकील अजय बगाड़िया ने कहा  कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध  करना किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। सीनियर एडवोकेट माथुर ने इलाक़े के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए अपनी जिंदगी गुजारी है | पुलिस ने उन्हें घर में नजरबंद कर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है |इसी लिए प्रदेश के अधिवक्ताओं को उनके समर्थन में खड़े होना चाहिए |

मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के सदस्य एडवोकेट सुनील गुप्ता ने कहा कि बहुत हैरत है कि जब माथुर जैसे सीनियर आदमी के साथ ऐसा किया जा रहा है फिर आम आदमी का क्या हाल होगा | इस बात से साफ़ तौर पर पता चलता है कि प्रशासन किसी को भी भोपाल मुठभेड़ के खिलाफ आवाज नहीं उठाने देना चाहता |उन्होंने कहा कि राज्य बार काउंसिल की अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी उसी के अनुसार कार्यवाई की जाएगी |

इंदौर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट पीके शुक्ला ने इस घटना की निंदा की है | उन्होंने एडवोकेट माथुर को घर में नज़रबंद करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाई की मांग की है |

गौरतलब है कि 31 अक्टूबर को भोपाल सेंट्रल जेल को फ़रार हुए कथित तौर पर पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों ने पुलिस आपरेशन की सच्चाई पर सवाल उठाया गया है |

आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता माधुरी कृष्णास्वामी ने कहा कि “भोपाल मुठभेड़ कि सरकार की थ्योरी पर बहुत सवाल उठ रहे हैं | लेकिन सरकार आम लोगों की आवाज को दबाने करने की कोशिश कर रही है|

सोशियो-लीगल स्टडीज़ के चेयरपर्सन और नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल में सोशियोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ तपन मोहंती ने कहा कि यह संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है | इस तरह के मामलों को पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं बल्कि क़ानूनी समझदारी से सुलझाना चाहिए |

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