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भोपाल सेंट्रल जेल से भागे सिमी के 8 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने मार गिराया

भोपाल : सेंट्रल जेल भोपाल से भागे सिमी के आठ कार्यकर्ता को सुबह पुलिस ने अचारपुरा – ईद खेड़ी के पास घेरकर इन आठों को मार गिराया। घटना के बाद से ही प्रदेशभर में पुलिस को अलर्ट कर दिया गया था। इस दौरान पुलिस को सूचना मिली की संदिग्ध आतंकी जेल से 10 किमी की दूरी पर एक गांव में छिपे हैं। पुलिस ने वहां पहुंचकर घेराबंदी कर ली और आतंकियों को सरेंडर करने के लिए कहा, इस दौरान वे प्रतिरोध करने लगे। जिस पर पुलिस ने फायरिंग कर दी और आठों मारे गए।

सिमी के आठ कार्यकर्ता में शेख मुजीब, माजिद खालिद, अकील खिलची, जाकिर, सलीख महबूब और अमजद शामिल हैं। ये सभी ओढ़ने वाली चादरों से सीढ़ी बनाकर जेल की दीवार फांदकर भागे थे। कथित सिमी कार्यकर्ताओं के मारे जाने के बाद पुलिस प्रशासन और भोपाल सहित प्रदेशभर के लोगों ने राहत की सास ली है। मालूम हो की स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया यानी सिमी एक प्रतिबंधित संगठन है जिस पर भारत सरकार इस्लामी कट्टरपंथ फैलाने और कई अन्य गंभीर आरोप लगाती है.

सभी फरार होने वाले संदिग्ध आतंकियों पर पांच-पांच लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। इनमें कुछ वो आतंकी भी शामिल हैं, जो सात वर्ष पूर्व मप्र की खंड़वा जेल से फरार हुए थे। घटना में मृत प्रधान आरक्षक का नाम रमाकांत यादव है। मध्यप्रदेश के गृहमंत्री ने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक माना है और जिम्मेदारों कार्रवाई करने की बात कही है। मामले में जेल अधीक्षक, उप अधीक्षक, प्रधान आरक्षक सहित दो अन्य को सस्पेंड कर दिया गया है।

सिमी संदिग्ध आतंकियों के फरार होने पर केंद्र सरकार ने मप्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है। मामले को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम में डीजीपी, आईजी भोपाल, डीआईजी भोपाल सहित अधिकारियों ने बैठक की और सीएम शिवराज सिंह चौहान को प्रारंभिक रिपोर्ट सौपी। सीएम ने घटना की जांच का जिम्मा पूर्व डीजीपी नंदन दुबे को सौप दिया है। सीएम ने कहा कि लापरवाही राष्ट्रद्रोह है।
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घटना रात दो से चार बजे के बीच की है। प्रधान आरक्षक रमाशंकर यादव और आरक्षक चंदन सिंह ड्यूटी बदलने के लिए मिले थे। इसी दौरान आठ आतंकियों ने इन पर हमला कर दिया। प्रधान आरक्षक यादव की चम्मच या प्लेट से बनाए गए धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी और आरक्षक चंदन के हाथ-पैर बांध दिए। इसके बाद चादर में लकड़ी बांधकर उसकी सीढ़ी बनाई और करीब 25 फीट ऊंची दीवार को फांदकर दूसरी तरफ निकल गए। सभी आरोपी बी ब्लॉक में थे। फरार आठ आतंकियों में से चार खंडवा जेल से फरार हुए थे। बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी जेल प्रबंधन को सुबह 4:30 पर मिली।

2 अक्टूबर 2013 को सिमी के सात आतंकी खंड़वा जेल से फरार हो गए थे। बाद में एटीएस और पुलिस ने इन्हें अलग-अलग स्थानों से पकड़ लिया था। सभी को कड़ी सुरक्षा में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद करके रखा गया था। देर रात भागे गए आठ आतंकियों में कुछ वे आतंकी भी शामिल है जो पहले खंड़वा जेल से भाग चुके हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं ने भागने का षडयंत्र रचा होगा। अब भी जेल में 22 सिमी आतंकी कैद हैं।

केन्द्र से मिले अलर्ट के बाद खुफिया एजेंसियो की नजर सिमी के इन्हीं लापता संदिग्ध आतंकियों पर है, जो संगठन के बैन होने के बाद से ना तो पकड़े ही गए और ना ही किसी वारदात में उनका नाम सामने आया। इस अलर्ट के बाद यूपी के अंदर बैठे इन आतंकियों के मददगारों पर पुलिस ने निगाह गढ़ा दी है।

आईबी ने साफ तौर पर कहा है कि सिमी के जो आतंकी बीते कई सालों से अंडरग्राउंड हैं, जिनके बारे में यूपी पुलिस और उसकी इंटेलीजेंस को कोई सुराग तक नहीं है वो अब नया खतरा बन गए हैं। लिहाजा उनकी तलाश तेज की जाए। उनके मददगारों पर नजर रखी जाए।

सिमी के साथ ही करीब दस वर्ष पहले क्रिकेट मैच देखने के नाम पर वीजा लेकर भारत आये पाकिस्तानी नागरिक भी अब सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं। यह लोग भारत आये तो लेकिन वापस नहीं गए। इनकी संख्या करीब 400 के करीब है। रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि पासपोर्ट लेकर आये पाकिस्तानियों से देश को खतरा कम ही रहा है।

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