Monday , December 18 2017

मंसूबाबंदी कमीशन के आदाद-ओ-शुमार हक़ीक़त से दूर

यू पी ए की हलीफ़ एन सी पी समेत मुखतलिफ सियासी जमातों ने मंसूबा बंदी कमीशन(योजना आयोग के इस दावे को मुस्तरद कर दिया कि ग़रीब अवाम की तादाद में नुमायां कमी हुई और अब ये सिर्फ़ 21.9 फ़ीसद है।

यू पी ए की हलीफ़ एन सी पी समेत मुखतलिफ सियासी जमातों ने मंसूबा बंदी कमीशन(योजना आयोग के इस दावे को मुस्तरद कर दिया कि ग़रीब अवाम की तादाद में नुमायां कमी हुई और अब ये सिर्फ़ 21.9 फ़ीसद है।

उन्होंने कहा कि ग़ुर्बत के ताय्युन के तरीका-ए-कार को तबदील करने की ज़रूरत है। एन सी पी जो ने यू पी ए का हिस्सा है, मंसूबा बंदी कमीशन के आदाद-ओ-शुमार से इत्तिफ़ाक़ नहीं किया। वज़ीर भारी सनअतें प्रफ़ुल पटेल ने कहा कि फी कस यौमिया आमदनी-ओ-मसारिफ़ का ताय्युन बिलकुलिया ग़लत अंदाज़ में किया गया है। बी जे डी ने कहा कि मुल्क की आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी ग़ुर्बत का शिकार है।

सी पी आई(एम) लीडर बृंदा कारत ने कहा कि ये आदाद-ओ-शुमार फ़र्ज़ी और हक़ीक़त से दूर हैं और ये ग़रीबों के ज़ख्म पर नमक छिड़कने के बराबर हैं।

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