मआशी सेहत की बहाली केलिए कड़वी दवा की ज़रूरत

मआशी सेहत की बहाली केलिए कड़वी दवा की ज़रूरत
वज़ीरफ़ीनानस पी चिदम़्बरम ने आने वाले दिनों में चंद सख़्त मआशी इक़दामात का इशारा देते हुए आज कहा कि मआशी सेहत की बहाली और मईशत को भारी तरक़्क़ी के रास्ते पर लाने केलिए कुछ कड़वी दवा की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि इस साल कुछ कड़वी दवा देन

वज़ीरफ़ीनानस पी चिदम़्बरम ने आने वाले दिनों में चंद सख़्त मआशी इक़दामात का इशारा देते हुए आज कहा कि मआशी सेहत की बहाली और मईशत को भारी तरक़्क़ी के रास्ते पर लाने केलिए कुछ कड़वी दवा की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि इस साल कुछ कड़वी दवा देने की ज़रूरत को भी हमें कड़वी दवा का घूँट पीना होगा इसके बगै़र कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

कड़वी दवा एक अच्छी दवा होती है, जिससे मईशत की सेहत बहाल होती है और आइन्दा साल हम तरक़्क़ी की भारी शरह की तरफ़ देख सकते हैं। चिदम़्बरम लोक सभा में आज ज़िमनी मुतालिबात ज़र के पहले हिस्से पर मुबाहिस के इख़तेताम पर बयान दे रहे थे। वाज़िह रहे कि मुल्क की शरह तरक़्क़ी 9 फ़ीसद से ऊपर तक पहुंच जाने के बाद 2011-12में 6.5 फ़ीसद तक पहुंच गई जो 9 साल के दौरान सबसे कमतरीन सतह है।

रवां माली साल के दौरान रिज़र्व बैंक औफ़ इंडिया के तख़मीना के मुताबिक़ शरह तरक़्क़ी 5.8 फ़ीसद होगी। वज़ीरफ़ीनानस ने इस यक़ीन का इज़हार किया कि इफ़रात-ए-ज़र जो बदस्तूर बाइस तशवीश बना हुआ है और एक चैलेंज भी है, लेकिन आइन्दा दो तीन महिने के दौरान ये एतिदाल पर आजाएगा। उन्होंने मज़ीद कहा कि इफ़रात-ए-ज़र एक चैलेंज है। इफ़रात-ए-ज़र हुकूमत को परेशान करता है।

फ़िलहाल इफ़रात-ए-ज़र की शरह ज़्यादा है लेकिन एक ख़ुशख़बरी ये है कि इसमें कमी का रुजहान देखा जा रहा है। अगर कमी का रुजहान है तो यक़ीनन बाइस इतमीनान है। ठोक फ़रोशी की इफ़रात-ए-ज़र नवंबर में 7.24 फ़ीसद की मोतदिल सतह पर रही जो एक महिने पहले 7.45 फ़ीसद थी जबकि चिल्लर फ़रोशी में इफ़रात-ए-ज़र की शरह नवंबर के दौरान 9.9 फ़ीसद रही जो अक्टूबर में 9.75 फ़ीसद थी।

बादअज़ां बी जे पी और तृणमूल कांग्रेस के अरकान के वाक आउट के दरमियान लोक सभा में ज़िमनी मुतालिबात ज़र का पहला हिस्सा मंज़ूर करलिया जो माली साल 2012-13 के दौरान सरकारी मसारिफ़ को 32.120 करोड़ रुपय तक बढ़ाने केलिए पेश किए गए थे।

मजमूई रक़म 30,804 करोड़ के मिनजुमला 28,500 करोड़ रुपय तेल पर दी जाने वाली सब्सीडी पर ख़र्च होंगे और दीगर 2 हज़ार करोड़ रुपय एर इंडिया की बाज़ आबादकारी पर सिर्फ़ किए जाऐंगे।

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