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मईशत को मुस्तहकम बनाने मज़ीद पॉलीसी फैसलों का इमकान चिदम़्बरम

आर बी आई की जानिब से महफ़ूज़ रुकमी ज़ख़ाइर की शरह में कटौती का ख़ैर मुक़द्दम : वज़ीर फ़ैनानिस का रद्द-ए-अमल हुकूमत की जानिब से आइन्दा देढ़ महीने में तरक़्क़ी की शरह को बेहतर बनाने केलिए मज़ीद पॉलीसी इक़दामात किए जाएंगे । वज़ीर फ़ैनानिस मिस्ट

आर बी आई की जानिब से महफ़ूज़ रुकमी ज़ख़ाइर की शरह में कटौती का ख़ैर मुक़द्दम : वज़ीर फ़ैनानिस का रद्द-ए-अमल हुकूमत की जानिब से आइन्दा देढ़ महीने में तरक़्क़ी की शरह को बेहतर बनाने केलिए मज़ीद पॉलीसी इक़दामात किए जाएंगे । वज़ीर फ़ैनानिस मिस्टर पी चिदम़्बरम ने रिज़र्व बैंक औफ़ इंडिया की जानिब से महफ़ूज़ रुकमी ज़ख़ाइर की शरह में 0.25 फीसद की कटौती का ख़ैर मुक़द्दम करते हुए इस ख़्याल का इज़हार किया है ।

आर बी आई के इस फैसले के नतीजे में 17,000 करोड़ रुपय मार्किट में आ सकें गे । मिस्टर चिदम़्बरम ने अख़बारी नुमाइंदों से बात चीत करते हुए कहा कि उन्हें यक़ीन है कि अब से आइन्दा 30 अक्टूबर के दरमियान हुकूमत की जानिब से कई इज़ाफ़ी पॉलीसी इक़दामात किए जाएंगे और इक़तिसादी इस्तिहकाम को यक़ीनी बनाने केलिए मंसूबा तय्यार किया जाएगा। उन्हों ने कहा कि इन इक़दामात के नतीजे में 30 अक्टूबर तक शरह तरक़्क़ी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है ।

30 अक्टूबर को रिज़र्व बैंक की जानिब से दूसरे सहि माही केलिए मआशी पॉलीसी पर नज़र-ए-सानी का इमकान है । आज वस्त सहि माही मालीयाती पॉलीसी जायज़ा में आर बी आई ने महफ़ूज़ रुकमी ज़ख़ाइर की शरह में कमी की है । आर बी आई ने ताहम मुख़्तसर मुद्दती क़र्ज़ा जात की शरह में कोई तबदीली नहीं की है जिस से सनअती गोशों में मायूसी हुई है । मिस्टर चिदम़्बरम ने कहा कि आज आर बी आई की जानिब से रुकमी ज़ख़ाइर की शरह में कमी का जो फैसला किया गया वो एक छोटा क़दम है लेकिन इस का ख़ैरमक़दम किया जाता है ।

वो आर बी आई की पॉलीसी से मायूस नहीं हैं। वस्त सहि माही जायज़ा हौसलाअफ़्ज़ा है और इस से शरह तरक़्क़ी को बेहतर बनाने की कोशिशों में मदद मिल सकती है । आर बी आई की जानिब से इस सिलसिले में मज़ीद फैसले किए जा सकते हैं। गुज़िशता महीने वज़ारत फ़ैनानिस की ज़िम्मेदारी सँभालने के बाद वज़ीर फ़ैनानिस ने कहा था कि वो मईशत को मुस्तहकम करने और सरमाया कार के एतिमाद और हौसले को बेहतर बनाने के इक़दामात पर तवज्जु देंगे ।

मुल्क में फ़िलहाल मआशी तरक़्क़ी गुज़िशता नौ साल में सब से कम होगई है और ये सिर्फ़ 6.5 फीसद होगई है । अप्रैल से जून के दरमियान सहि माह में ये शरह 5.5 फीसद ही रह गई थी । गुज़िशता साल इस मुद्दत के दौरान ये शरह 8 फीसद दर्ज की गई थी । हुकूमत की जानिब से इस्लाहात के कुछ इक़दामात का पहले ही ऐलान कर दिया गया है । हुकूमत ने रीटेल शोबा में रास्त बैरूनी सरमाया कारी की इजाज़त देदी है और हुआ बाज़ी के शोबा में भी सरमाया कारी को मंज़ूरी दी गई है । हुकूमत ने गुज़िशता दिनों डीज़ल की कीमत में फ़ी लीटर पाँच रुपय का इज़ाफ़ा किया था और घरेलू सारफ़ीन को फ़राहम की जाने वाली पकवान गैस के सलेंडरस की इमदादी कीमतों पर स्पलाई में भी कटौती करदी थी ।

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