Saturday , January 20 2018

मकतूब बराए वज़ीर-ए-आज़म का अफ़शा बड़ी ग़द्दारी

अपनी बरतरफ़ी के मुतालिबात का सामना करने वाले फ़ौजी सरबराह जनरल वी के सिंह ने आज कहा कि वज़ीर-ए-आज़म को मौसूमा उनके मकतूब का अफ़शा‍ ए‍ हो जाना इस फ़ोर्स की दिफ़ाई तैयारी की मायूसकुन तस्वीर पेश करता है, जिसे बड़ी ग़द्दारी समझा जाना चाहीए और

अपनी बरतरफ़ी के मुतालिबात का सामना करने वाले फ़ौजी सरबराह जनरल वी के सिंह ने आज कहा कि वज़ीर-ए-आज़म को मौसूमा उनके मकतूब का अफ़शा‍ ए‍ हो जाना इस फ़ोर्स की दिफ़ाई तैयारी की मायूसकुन तस्वीर पेश करता है, जिसे बड़ी ग़द्दारी समझा जाना चाहीए और अफ़शा-ए-के ज़रीया से बे रहमाना अंदाज़ में निमटना चाहीए।

अफ़शा-ए-के ज़रीया का पता चलाने के लिए फ़ौजी सरबराह का मुतालिबा ऐसे वक़्त हुआ है जब दिफ़ा के ज़राए ने कहा कि इंटेलीजेंस ब्यूरो से मीडिया के लिए इस मकतूब के अफ़शा-ए-की तहकीकात करने के लिए कहा गया है। उसे वक़्त जबकि वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह को उनके सरकारी मकतूब के अफ़शा-ए-पर उन के और हुकूमत के दरमियान कशीदगी बढ़ चुकी है , जनरल सिंह ने जवाबी वार करते हुए कहा कि इनकी साख को मुतास्सिर करने के लिए जारी तर्ज़-ए-अमल रुकना चाहीए।

आर्मी हेडक्वार्टर्स की जानिब से जारी कर्दा एक मुख़्तसर ब्यान में जनरल सिंह ने जो मौजूदा तौर पर जम्मू-ओ-कश्मीर में हैं, मज़ीद कहा कि वज़ीर-ए-आज़म और वज़ीर दिफ़ा के साथ उनकी सरकारी ख़त-ओ-किताबत मुराआत वाली ख़त-ओ-किताबत होती है । जनरल सिंह ने जो 31 मई को सबकदोश होने वाले हैं , कहा कि इस मकतूब के अफ़शा-ए-को बड़े पैमाने पर ग़द्दारी समझा जाना चाहीए ।

और इस अफ़शा-ए-के ज़राए को ढूंढ कर उन से सख़्ती से निमटा जाना चाहीए ।

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