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मक़बरा मीर हैदर अली को शादी ख़ाने में तब्दील होने से बचाना वक़्फ़ बोर्ड की ज़िम्मेदारी

हमारे शहर में एसा लगता है कि बड़े ही मुनज़्ज़म पैमाने पर क़ब्र फ़रोश टोलियां सरगर्म हो गईं हैं । जो क़ुबूर-ओ-मक़बरों को मिस्मार करते हुए वहां आलीशान इमारतें और शादी ख़ाने तामीर करने की नापाक हरकतें कर रहे हैं । ऐसी ही एक टोली उस वक़्त बेनकाब होगई जब ईदी बाज़ार बंद नाका के करीब इंतिहाई क़दीम(पुरानी) क़ब्रिस्तान मक़बरा मीर हैदर अली की क़ुबूर को मिस्मार करते हुए वहां शादी ख़ाना तामीर करने की वो कोशिश कर रही थी ।

नाआक़बत अंदेश और बे ईमानों की इस टोली को अपने नापाक अज़ाइम में कामयाबी भी मिल जाती अगर मुक़ामी अवाम और वक़्फ़ बोर्ड हरकत में ना आते । तफ़सीलात के मुताबिक़ बंद नाका ईदी बाज़ार संतोष नगर में एक 400 साला क़दीम(पुरानी) क़ब्रिस्तान मक़बरा मीर हैदर अली वाक़ै है उसे सैफ़ उल-मलिक का मदरसा और मीर पाशाह का मक़बरा भी कहा जाता है ।

तक़रीबन 22 सौ मुरब्बा गज़ पर मुहीत(फैला हुवा) इस मक़बरा में अपने दौर की कई बुज़ुर्ग और मारूफ़ हस्तियों की मज़ारात और क़ुबूर हैं इस क़ब्रिस्तान का रेकॉर्ड वक़्फ़ बोर्ड में दर्ज है जिस का सीरीयल नंबर 54 कुन्दे कल V बताया गया है । और इस का शुमार दरगाह हज़रत ब्रहना शाह साहब (र) के क़ब्रिस्तानों में ही होता है । कुछ दिन कब्लमुक़ामी अवाम और वक़्फ़ बोर्ड ओहदेदार की दी गई इत्तिला पर मीडिया ने भी इस क़दीम(पुरानी) क़ब्रिस्तान की बेहुर्मती और उसे एक शादी ख़ाने में तब्दील किये जाने की कोशिशों पर अपनी तवज्जा मर्कूज़ की । जिस पर इस नाजायज़ और गैर शरई क़बज़े के ताल्लुक़ से कई राज़ फ़ाश हुए ।

मुक़ामी अवाम और वक़्फ़ बोर्ड टास्क फ़ोर्स के इन्सपैक्टर मुहम्मद अबदुलक़ुद्दूस की जानिब से पुलिस इस्टेशन संतोष नगर में की गई शिकायत के मुताबिक़ मीर उमर अली ख़ां अब्दुह लतीफ़ और मुहम्मद ज़ाकिर ने सिर्फ और सिर्फ अपने माली फ़ायदे के लिये इस मक़बरा की कई क़ुबूर को मिस्मार कर दिया । उन की बेहुर्मती की यहां तक कि इन लोगों ने क़ुबूर के क़दीम(पुरानी)-ओ-कीमती पत्थरों को डरेंज पाइपलाइन के पास फेंक कर करीब ही एक गेट भी लगादी हद तो ये है कि इन लोगों ने क़ब्रिस्तान में ही एक डरेंज पाइपलाइन तनसीब भी करदी ।

गधे को ज़ाफ़रान की क्या क़दर के मिस्दाक़ इन लैंड गराबरस ने चुन चुन कर क़ुबूर को मिस्मार करते हुए उन्हें ज़मीन के बराबर कर दिया और लारियों के ज़रीया सैंकड़ों टन मिट्टी लाकर उन के वजूद को मिटा दिया । ज़िन्दों से डरने वाले इन कब्ल(लोगों) ने मरहूमीन से किसी किस्म की मुरव्वत तक नहीं की और देखते ही देखते क़ुबूर पर एक मकान भी तामीर कर दिया ताकि वक़्फ़ बोर्ड या अवाम को ये तास्सुर दिया जा सके कि यहां क़ुबूर मौजूद ही नहीं थीं ।

लेकिन मुक़ामी अवाम और समाजी कारकुन क़ाबिल मुबारकबाद हैं कि फ़ौरी उस की इत्तिला वक़्फ़ बोर्ड को दी और हैरत-ओ-ताज्जुब की बात ये है कि वक़्फ़ बोर्ड ने बिलकुल पहली मर्तबा इंतिहाई पेशा वाराना अंदाज़ में काम करते हुए मुतास्सिरा क़ब्रिस्तान का चार्ज ले लिया । इस सिलसिला में पुलिस इस्टेशन संतोष नगर में शिकायत पेश करते हुए 16 अप्रैल को एक मुक़द्दमा भी दर्ज करवाया गया जिस का क्राईम नंबर 86/2012 U/S 297 R/W 34 IPC है । वक़्फ़ बोर्ड के मुताबिक़ सर्वे कमिशनर वक़्फ़ के हाँ इस क़ब्रिस्तान का हवाला सीरीयल नंबर 117 के साथ मौजूद है ।

जिस में बताया गया है कि मकान नंबर 18-8-115 और 18-8-116 के दरमियान मक़बरा मीर हैदर शाह वाक़ै है । पुलिस में शिकायत के साथ ही सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड ख़ुसरो पाशाह की हिदायत पर टास्क फ़ोर्स वक़्फ़ बोर्ड के अमला ने वहां पहुंचकर सारे क़ब्रिस्तान की वीडियोग्राफी की और पंचनामा किया । पुलिस ने मीडिया की मौजूदगी में इस मक़बरा की गेट की चाबियां वक़्फ़ बोर्ड ओहदेदारों के हवाले करदी ।

बोर्ड के ओहदेदार ने चाबियों के हुसूल के साथ ही वहां दो बोर्डस नसब कर दीए जिस पर तहरीर किया गया कि ये क़ब्रिस्तान मौक़ूफ़ा है और इस पर क़बज़ा करने वाले कब्ल(लोगों) के ख़िलाफ़ क़ानूनी चाराजूई की जाएगी लेकिन अफ़सोस के कुछ दिन कब्ल ये लोग फिर एक बार नमूदार हुए और वक़्फ़ बोर्ड ने गेट पर जो ताले लगाए थे उसे तोड़ डाला ।

और बोर्डस पर दर्ज तहरीर को भी मिटा डाला फिर एक बार अवाम समाजी कारकुन और वक़्फ़ बोर्ड पुलिस संतोष नगर से रुजू हुए जिस पर मीर उम्र अली ख़ां , अब्दुह लतीफ़ और मुहम्मद ज़ाकिर को तलब कर के पुलिस ने इस मक़बरा और क़ब्रिस्तान से दूर रहने के लिये पाबंद अह्द किया । पुलिस ने मीडिया की मौजूदगी में ही इन अफ़राद को हिदायत दी कि वो अंदरून 24 घंटे क़ब्रिस्तान में मौजूद क़दीम(पुरानी) मकान का तख़लिया(खाली) भी करदें लेकिन पता नहीं आज तक भी इस मकान का तख़लिया (खाली)नहीं किया गया । वाज़ेह रहे कि मक़बरा हैदर अली का इलाक़ा शेखी का नल के नाम से भी मशहूर है ।

अब देखना ये है कि वक़्फ़ बोर्ड कहां तक इस मक़बरा का तहफ़्फ़ुज़ करने में कामयाब रहती है क्यों कि पाबंद किए जाने के बावजूद शादी ख़ाना बनाने के ख़ाहां अफ़राद बार बार क़ानून की ख़िलाफ़वरज़ी के मुर्तक़िब होरहे हैं । यहां सवाल ये पैदा होता है कि इन अफ़राद की पुश्तपनाही आख़िर कौन कर रहा है ? इस का मक़सद किया है ?
क्या नाम के मुस्लमान ये लोग इतने संगदिल हो गए हैं कि वो अपने पेट में क़ुबूर की मिट्टी भरने से भी ख़ौफ़ नहीं खाते ? ये सवालात तो अपनी जगह हैं लेकिन अब हर किसी की नज़र सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड मौलाना ख़ुसरो पाशा , चीफ ऐगज़ीक्यूटिव ऑफीसर , वक़्फ़ बोर्ड टास्क फ़ोर्स और इस के अमला पर लगी हुई हैं कि वो इस क़दीम(पुरानी)-ओ-तारीख़ी मक़बरा की हेफ़ाजत को किस तरह यक़ीनी बनाते हैं या फिर कुछ दिन सरगर्म रहते हुए हसब रिवायत ख़ामोश हो जाते हैं ।

अवाम अब बेदार हो चुके हैं उसे वक़्ती तौर पर हरकत में आते हुए बेवक़ूफ़ नहीं बनाया जा सकता । इस कीमती ओक़ाफ़ी जायदाद को बचाना बहुत ज़रूरी है और साथ ही उसे लोगों का समाजी बाईकॉट भी किया जाना वक़्त की अहम तरीन ज़रूरत है ताकि उन की कबील के कोई और ना पसंदीदा लोगों क़ुबूर पर बुरी नज़र डालने की हिम्मत ना कर सकें ।।

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