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मक्का माल में पेरिस हिल्टन के स्टोर पर मुसलमान ब्रहम

लास ए‍ंजलिस, २३ नवंबर (एजेंसी) शहर मुक़द्दस मक्का मुकर्रमा सऊदी अरब में पेरिस हिल्टन ने अपना नया स्टोर क़ायम किया है, जिस पर मुसलमानों में शदीद ब्रहमी (गुस्सा) पाई जाती है और उन्होंने सदाए एहतिजाज बुलंद की है। 31 साला पेरिस हिल्टन को

लास ए‍ंजलिस, २३ नवंबर (एजेंसी) शहर मुक़द्दस मक्का मुकर्रमा सऊदी अरब में पेरिस हिल्टन ने अपना नया स्टोर क़ायम किया है, जिस पर मुसलमानों में शदीद ब्रहमी (गुस्सा) पाई जाती है और उन्होंने सदाए एहतिजाज बुलंद की है। 31 साला पेरिस हिल्टन को विरासत में कई होटलें मिली हैं और वो मग़रिबी तहज़ीब की नुमाइंदा शख़्सियत हैं जिनकी समाजी सरगर्मीयां और पार्टीयां काफ़ी शोहरत रखती हैं।

इन पार्टीयों में सिर्फ़ मुतमव्विल और साहब-ए-स्रोत ही शरीक होते हैं जहां मग़रिबी कल्चर का भरपूर इज़हार किया जाता है। एक ऐसी परागंदा ज़हन रखने वाली और ग़ैरमुस्लिम ख़ातून की जानिब से मुक़द्दस शहर में स्टोर क़ायम करना इस्लामी तहज़ीब-ओ-रवायात की तौहीन के मुतरादिफ़ है।

पेरिस हिल्टन ने टोइटर पर इस स्टोर की तस्वीर जारी करते हुए बताया कि ये सऊदी अरब में पांचवां और मजमूई तौर पर 42 वां स्टोर है। सी एन एन ऑनलाइन के मुताबिक़ पेरिस हिल्टन ने ट्विटर पर लिखा कि मक्का माल, सऊदी अरब में मेरा ख़ूबसूरत और पसंदीदा नया स्टोर शुरू हो चुका है और मुझे बेहद ख़ुशी हो रही है।

मेरे ब्रांड की बढ़ती मक़बूलियत पर में फ़ख़र महसूस कर रही हूँ। पेरिस हिल्टन के इस ऐलान के साथ ही मुख़ालिफ़त का सिलसिला शुरू हो गया और मुसलमानों ने शदीद नाराज़गी का इज़हार करते हुए उसे मक्का मुकर्रमा की इहानत के मुतरादिफ़ क़रार दिया।

मक्का मुकर्रमा में मुबल्लिग शेख़ अदनान बहरीत ने कहा कि ऐसे मुक़ाम पर इस तरह का स्टोर गै़रज़रूरी है क्योंकि हमें इसकी बिलकुल ज़रूरत नहीं। अगर हमारे बस में होता तो हम सऊदी अरब में में पेरिस हिल्टन के तमाम शॉप्स बंद कर दे। एक और शख़्स ने लिखा कि इस ख़ातून के पस-ए-मंज़र से वाक़फ़ीयत के बाद जिसने वीडीयो भी तैयार किए थे, आख़िर किस तरह मुक़द्दस शहर में हरम शरीफ़ के क़रीब स्टोर खोलने की इजाज़त दी गई।

दीगर मुसलमानों ने भी मक्का‍ मुकर्रमा के अतराफ़ तिजारती सरगर्मीयों में ग़ैरमामूली इज़ाफ़ा पर ब्रहमी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि हमें ये भी देखना चाहीए कि मक्का मुकर्रमा का जो इमतियाज़ी वस्फ़ है इसे बरक़रार रखा जाए, लेकिन इन दिनों ऐसा लगता है कि तिजारती पहलू को नुमायां एहमीयत मिल गई है।

चुनांचे तारीख़ी और इस्लामी विरसे को ख़त्म करते हुए असरी मॉल्स और इंटरनैशनल ब्रांड्स को तर्जीह दी जा रही है। एक ब्लॉग पर किसी ने लिखा कि बिलख़सूस पेरिस हिल्टन के स्टोर पर ब्रहमी की कोई वजह नहीं क्योंकि यहां पहले ही से GUCCI और ChristianDior मौजूद हैं।

हमें फ़िक्र इस बात पर है कि इस शहर के तक़द्दुस को बुरी तरह पामाल किया जा रहा है। एक और शख़्स ने रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए कहा कि मक्का मुकर्रमा दुनिया भर के मुसलमानों के लिए अपनी जान से भी ज़्यादा अज़ीज़ है। ये हुर्मत वाला शहर है और यहां आने वाले रुहानी तसकीन हासिल करते हैं।

ऐसे मुक़ाम पर दुनियावी आलाईश के सामान की कोई ज़रूरत नहीं। यहां आने वालों की ज़िंदगी में नुमायां तबदीली आ जाती है और वो दुनिया को नहीं बल्कि दीन को मुक़द्दम रखते हैं। चुनांचे इस शहर की हुर्मत का लिहाज़ रखते हुए उसे इंतिज़ामात‍ ओ‍ सहूलीयात से गुरेज़ किया जाना चाहीए जो यहां आने वाले बंदगान ख़ुदा को दुनियावी उमोर ( Affairs) की तरफ़ राग़िब करें।

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