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मजबूर और गरीब वालिदैन महज 500 रुपये में दे दी अपनी मासूम बच्ची

वो गरीब भी थे और मजबूर भी थे। इसीलिए कलेजे पर पत्थर रख उन्होंने फूल सी कोमल दो बेटियों को खुद से दूर कर दिया। उम्मीद थी कि साथ ले जा रही खातून रिश्तेदार बेटियों की बेहतर परवरिश करेगी, लेकिन वो बेदर्द निकली।

वो गरीब भी थे और मजबूर भी थे। इसीलिए कलेजे पर पत्थर रख उन्होंने फूल सी कोमल दो बेटियों को खुद से दूर कर दिया। उम्मीद थी कि साथ ले जा रही खातून रिश्तेदार बेटियों की बेहतर परवरिश करेगी, लेकिन वो बेदर्द निकली।

महज 500 रुपये में दो बेटियों का सौदा कर दिया। यहां हमदर्दी जताने वाली खतौउन तो सितमगर निकली। उसने अपने 35 साल के बेटे की शादी 12 साल की बच्ची से करा दी। मुहल्ले के लोगों की इत्तेला पर पुलिस सरगर्म हुई और दोनो बच्चियों आज़ाद कराकर थाने ले आई।

यह दर्द भरी कहानी है झांसी की रहने वाली 12 साल की वर्षा और उसकी आठ साल की बहन की। वालिदैन बेलदारी करते हैं। घर में चार बहनें और एक भाई है। करीब छह दिन पहले एक रिश्तेदार खातून दोनों बेटियों को देखभाल के नाम पर घर ले आई।

मजलूम बाप ने यह सोचकर बच्चियों को खुद से दूर कर लिया कि बेटियों को इससे तो बेहतर परवरिश मिलेगी। मगर आगरा लाने के बाद रिश्तेदार खातून ने बच्चियों को कालिंदी विहार में रहने वाली अपनी दूर की रिश्तेदार मुन्नी के घर पहुंचा दिया। मुन्नी की आंख का ऑपरेशन हुआ है।

घर में काम करने के लिए मुन्नी ने दोनों बच्चियों को घर रख लिया। इसके एवज में मुन्नी ने खातून को पांच सौ रुपये दिए। शुरुआत में मुन्नी ने दोनों से कहा कि वह उन्हें बेटी की तरह रखेगी। मगर, 19 फरवरी को उसने अपने 35 साला बेटे राजू से 12 साल की वर्षा की घर में ही शादी करा दी।

वर्षा की छोटी बहन भी घर में ही रह रही थी। धीरे-धीरे राजू की शादी की खबर मुहल्ले में फैलने लगी। मंगल के रोज़ सुबह पड़ोसी नई नवेली बहू को देखने के लिए मुन्नी के घर पहुंचे तो वह 12 साल की वर्षा थी। आसपास के लोगों ने इसका विरोध किया।

इसी बीच किसी ने पुलिस को इत्तेला दे दी। पुलिस दोनों बच्चियों को थाने ले आई। एसओ एत्माद्दौला शैलेंद्र सिंह का कहना है कि दोनों बच्चियों को रिश्तेदार खातून लेकर आई थी। देखभाल के लिए यहां मुन्नी के पास छोड़ गई थी। आज़ाद कराई गई बच्चियों को उनके वालिदैन के पास भेजा जा रहा है।

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