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मध्यप्रदेश : गोला-बारूद से भरी बोगी में आग, 14 हजार स्मोक बम फटे

जबलपुर. आयुध निर्माणी खमरिया सोमवार शाम तकरीबन 7 बजे फिर दहल उठी, सेक्शन एफ-8 में इतना भीषण धुआं उठा कि दूर-दूर तक आसमान पर छा गया। फायर ब्रिगेड के वाहन तत्काल मौके पर रवाना हुए। हादसा उस वक्त हुआ, जब वैगन तकरीबन पूरी तरह से पैक हो गया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद जेडब्ल्यूएम ने दो अन्य कर्मचारियों के साथ मॉस्क लगाया और सीधे कपलिंग की ओर दौड़ लगाई। भीषण धुएं में कपलिंग खोलकर उस वैगन को अलग किया गया, जिसमें चंद मिनटों पहले ही स्मोक बम ठसाठस तरीके से लोड किया जा चुका था। हादसा बमों से लोड ट्रेन के एक वैगन में आग लगने से हुई है। सभी बोगियों को उड़ीसा स्थित पुलगांव आयुध डिपो के लिए रवाना किया जाना था।

हादसा और ज्यादा विकराल हो जाता, अगर कुछ दूरी पर खड़े तीन अन्य वैगन भी आग की चपेट में आ जाते। सूत्रों का कहना है कि एफ-8 में ही कुछ दूरी पर तीन अन्य वैगन आरसीएल बमों से लोड खड़े थे। दिन में एफ-2 व एफ-10 से बाकी की तीनों बोगियों को लोड किया गया था।

स्मोक बमों को सुलगने में ज्यादा वक्त नहीं लगा और वैगन के भीतरी हिस्से ने आग पकड़ ली। इससे बड़ा खतरा यह रहा कि चंद कदम की दूरी पर ही आरसीएल बमों से लोड तीन अन्य वैगन भी खड़े किए गए थे। बहरहाल, काफी कम समय में हादसे पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। लेकिन इस हादसे में तकरीबन 12 से 14 हजार बम पूरी तरह से बर्बाद हो गए।

घटना की खबर मिलते ही प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। एक लॉट में 1004 बम, बोगी में 15 लॉट- इस हादसे में कितना नुकसान हुआ, प्रशासन के लिए इसका सटीक अंदाजा लगाना हाल-फिलहाल मुश्किल है।

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है इस बम का इस्तेमाल धुआं उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। भारतीय सेना के अलावा अर्धसैनिक बलों में भी स्मोक बमों की खासी डिमांड है। कई बार दुश्मन, उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए इस तरह के बमों का इस्तेमाल किया जाता है। किसी बिल्डिंग, सुरंग से संदिग्धों को बाहर निकालने में भी इन्हीं बमों का उपयोग कारगर होता है।

जानकारों का कहना है कि बमों के ट्रांसपोर्टिंग के लिए उच्च स्तर की सावधानी रखी जाती है। पहले एक बॉक्स में 6 बम फिक्स किए जाते हैं। इसके लिए 84 बॉक्सों का एक लॉट बनता है, जिसमें कुल 1004 बम रहते हैं। इस तरह से एक बोगी में अधिकतम 15 लॉट लोड किए जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि जिस वक्त हादसा हुआ उस वक्त बोगी में 13 से 14 लाॅट रखे जा चुके थे।

2014 में भी यहां 2 लाख 25 हजार बम फट पडे़ थे और बिल्डिंग गिर गई थी। इस घटना में करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया, लेकिन जनहानी की कोई सामने नहीं आई है।

इसी तरह 2017 में भी एक के बाद एक 200 से ज्यादा बमों के फटने के धमाके हुए थे इससे आसपास का पूरा क्षेत्र दहल गया गया था आग की लपटें डेढ़ से 2 किमी दूर से दिखाई दे रही थी। यह हादसा निर्माणी के एफ-3 सेक्शन में बॉर वैगन में 125एमएम (एंटी टैंक एम्युनेशन) बमों की लोडिंग करते समय हुई थी।

बमों में धमाके होते ही कर्मचारियों में भगदड़ की बन गई थी धमाकों के तुरंत बाद फैक्ट्री के सभी गेट बंद कर दिए गए थे इससे शाम की शिफ्ट के करीब डेढ़ सौ कर्मचारी अंदर ही फंस गए।

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