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मनफ़ी किरदार के लिए शशी कल्ला मेरी आईडियल: रोहिणी हतनगडी

हिन्दी फिल्मों में कैरेक्टर रोल करनेवाली रोहिणी हतनगडी ने हालिया मुलाक़ात के दौरान बताया कि फ़िल्म चालबाज़ के बाद जब लोगों ने उन्हें गांधी में कस्तूरबा के रोल में देखा तो वो हैरान रह गए थे। एक ख़ानगी तक़रीब में शिरकत के वक़्त मीडिया स

हिन्दी फिल्मों में कैरेक्टर रोल करनेवाली रोहिणी हतनगडी ने हालिया मुलाक़ात के दौरान बताया कि फ़िल्म चालबाज़ के बाद जब लोगों ने उन्हें गांधी में कस्तूरबा के रोल में देखा तो वो हैरान रह गए थे। एक ख़ानगी तक़रीब में शिरकत के वक़्त मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यूं तो उन्होंने मतादाद रोलस‌ निभाए हैं लेकिन चालबाज़ में इन का किरदार मनफ़ी था जिस की सताइश की गई थी।

रोहिणी का कहना है कि मनफ़ी किरदारों के लिए वो शशी कल्ला को अपना आईडियल मानती हैं जिस तरह शशी कल्ला पर्दे पर मनफ़ी किरदार करती नज़र आती हैं, शाइक़ीन का उनसे नफ़रत करना ज़रूरी होजाता है और यही नफ़रत दरअसल अदाकार ये अदाकारा की कामयाबी है। रोहिणी ने कहा कि जब उन्होंने 70 के दहे की फ़िल्म नील कमल में ललीता पवार के साथ शशी कल्ला को देखा तो वो समझ गएं कि अब फ़िल्म में दोनों माँ बेटियां बहू वहीदा रहमान पर बहुत ज़ुल्म ढाएंगी और फ़िल्म की कहानी भी कुछ इसी तरह है जिसे देख कर शाइक़ीन आँसू बहाए बगैर नहीं रह सके थे।

रिचर्ड आएँ बरू की फ़िल्म गांधी में उन्होंने बेन गनगसले के साथ काम करने का अनोखा तजुर्बा हासिल किया। उन्होंने गांधी जी का किरदार कुछ इतनी महारत और ख़ूबसूरती से अदा किया था कि उनके सामने फ़िल्म के तमाम दीगर किरदार फीके पड़ गए थे। उन्हों ने कहा कि वो फिल्मों में अब बहुत कम दिखाई देती हैं जिस की वजह घरेलू मसरूफ़ियात है।

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