Friday , December 15 2017

मनमोहन ज़रदारी मसाएल पर क़दम बह क़दम रवैय्या के ख़ाहां

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और सदर-ए-पाकिस्तान आसिफ़ अली ज़रदारी ने बाहमी तौर पर काबिल-ए-क़बूल हल के लिए हिंद । पाक बाहमी मसाएल ( समस्याए) के सिलसिला में क़दम बह क़दम रवैय्या इख्तेयार करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और सदर-ए-पाकिस्तान आसिफ़ अली ज़रदारी ने बाहमी तौर पर काबिल-ए-क़बूल हल के लिए हिंद । पाक बाहमी मसाएल ( समस्याए) के सिलसिला में क़दम बह क़दम रवैय्या इख्तेयार करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।

वज़ीर-ए-दिफ़ा ए के अनटोनी ने आज कहा कि वज़ीर-ए-आज़म से 8 अप्रैल को मुलाक़ात के दौरान सदर-ए-पाकिस्तान ने निशानदेही की थी कि हिंद । पाक 5 ताल्लुक़ात में हाइल तमाम मसाएल ( समस्यांए) बिशमोल सरक्रीक, सियाचिन और जम्मू-ओ-कश्मीर की यकसूई ( बेफिक्री) ज़रूरी है, लेकिन यकसूई (( बेफिक्री) के लिए क़दम बह क़दम रवैय्या भी इख्तेयार करना ज़रूरी है।

वज़ीर-ए-दिफ़ा से सवाल किया गया था कि क्या उन के ख़्याल में बर्फ़ के तूदे गिरने का हालिया वाक़्या जिस में कई अम्वात ( मौतें) वाक़्य हो गई थीं और पाकिस्तान ने हिंदूस्तान से दरख़ास्त की थी कि सियाचिन ग्लेशियर से अफ़्वाज दस्तबरदार करवा ली जाए, दुरुस्त था। वज़ीर-ए-दिफ़ा ने कहा कि दोनों क़ाइदीन का एहसास था कि तमाम मसाइब ( कठिनाइयें) की हस्सास ( खुद्दारी) नौईयत के पेशे नज़र इन मसाएल का बाहमी काबिल-ए-क़बूल हल तलाश करने के लिए क़दम बह क़दम पेशरफ़त का रवैय्या इख्तेयार करना ज़रूरी है।

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