मप्र चुनाव: 15 सालों से एक ही मुस्लिम विधायक, क्या इस बार बदलेगी सूरत ?

मप्र चुनाव: 15 सालों से एक ही मुस्लिम विधायक, क्या इस बार बदलेगी सूरत ?

मध्यप्रदेश चुनावी की तैयारियां शुरू हो गई है। सभी दल जातिगत वर्गों के आधार पर टिकट देने का काम करते हैं, लेकिन मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने में हर राजनीतिक दल कंजूसी बरतते हैं। पिछले चुनाव में 5 मुस्लिम उम्मीदवार उतारने वाली कांग्रेस आगामी चुनाव में इसमें भी कटौती कर सकती है। भोपाल उत्तर से कांग्रेस के विधायक है आरिफ अकील। इनकी पहचान यह है कि मप्र विधानसभा में 15 वर्षों से इकलौते मुस्लिम विधायक हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार, मध्यप्रदेश में मुसलमानों की आबादी 47.74 लाख है यानी कुल आबादी का 6.5 फीसद, जो कुल 5,03,94,086 वोटरों का लगभग 10 फीसद है। यह आबादी पश्चिमी मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ और भोपाल संभाग में 40 सीटों पर दखल रखते हैं।

शाजापुर, मंडला, नीमच, महिदपुर, मंदसौर, इंदौर, नसरुल्लागंज, आष्टा जैसी सीटों में मुसलमानों की आबादी लगभग 20 फीसद है। इसके बावजूद पार्टियों ने मुस्लिम नेताओं को टिकट देने में हमेशा कंजूसी की है। पिछले पांच विधानसभा चुनावों में सिर्फ दो मुस्लिम उम्मीदवारों को भाजपा ने मैदान में उतारा जबकि कांग्रेस ने 2013 में 5 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे।

मध्यप्रदेश में 1962 में सबसे ज्यादा सात मुस्लिम विधायक जीते थे। वहीं पिछले 15 सालों से यानी 2003, 2008 और 2013 से एक मुस्लिम विधायक जीत पाया है। कांग्रेस प्रवक्ता रवि सक्सेना ने कहा कि हमने टिकट दिया, लेकिन हार गए। इससे भाजपा को फायदा हुआ। यह समझने में कोई परेशानी नहीं है कि क्यों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी या भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मध्यप्रदेश आकर मंदिर-मंदिर दर्शन कर रहे हैं।

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