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मप्र- बैतूल से बीजेपी सांसद ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाण पत्र रद्द, सदस्यता पर संकट

मध्यप्रदेश के बैतूल से बीजेपी सांसद ज्योति धुर्वे की लोकसभा की सदस्यता खतरे में है । ज्योति धुर्वे के आदिवासी होने के प्रमाण पत्र को मध्य प्रदेश सरकार की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने रद्द कर दिया है । साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।

ज्योति धुर्वे आदिवासियों के लिए सुरक्षित बैतूल लोकसभा सीट से दूसरी बार सांसद चुनी गई हैं । 2009 में जब पहली बार वे लोकसभा चुनाव जीती थीं तभी उनकी जाति को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन तब 5 साल के भीतर इस मामले की जांच नहीं हो पाई थी इसलिए वह शिकायत अपने आप रद्द मान ली गयी थी। बाद में बीजेपी ने उन्हें फिर से बैतूल से ही लोकसभा प्रत्याशी बनाया। वह चुनाव जीतकर लोकसभा भी पहुंची, लेकिन इस बार उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश की वजह से जांच करवाई।

राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने ज्योति के जाति प्रमाण पत्र की जांच की । समिति ने पाया है कि ज्योति धुर्वे ने खुद के आदिवासी होने का जो प्रमाण पत्र दिया है वह वैध नहीं हैं इसलिए उसे निरस्त कर दिया है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ज्योति धुर्वे के पिता पवार जाति के थे। वे बालाघाट जिले के रहने वाले थे। ज्योति की शादी बैतूल जिले के रहने वाले प्रेम धुर्वे से हुई थी। धुर्वे गोंड आदिवासी थे। उन्हीं की जाति के आधार पर ज्योति को 31 अक्टूबर 2002 को बैतूल के भैंसदेही ब्लॉक से जातिप्रमाण पत्र जारी हुआ था। ज्योति धुर्वे को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार नोटिस देकर बुलाया गया, लेकिन वह संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं। फिलहाल यह माना जा रहा है कि यदि राज्य सरकार ने जाति प्रमाण पत्र रद्द करने के आदेश पर अमल करवा दिया तो ज्योति धुर्वे की लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती है।

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