मप्र में असंतुष्टों को मनाने के मामले में कांग्रेस से ज्यादा बेहतर स्थिति में भाजपा

मप्र में असंतुष्टों को मनाने के मामले में कांग्रेस से ज्यादा बेहतर स्थिति में भाजपा

भोपाल 2 अक्टूबर । मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा के उप-चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस की असंतुष्टों ने नींद उड़ाकर रखी दी है। दोनों ही दल अपने असंतुष्टों को मनाने में लगे हैं। कांग्रेस के मुकाबले भाजपा अपने असंतुष्टों को मनाने के मामले में ज्यादा सफल होती नजर आ रही है।

राज्य के 28 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उप-चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान हो चुका है, तीन नवंबर को मतदान होगा और नतीजे 10 नवंबर को आएंगे। दोनों ही दल उम्मीदवारों के ऐलान के अंतिम चरण में है, कांग्रेस 24 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुकी है, भाजपा के उम्मीदवारों की सूची जल्दी आने की बात कही जा रही है।

भाजपा में 22 तत्कालीन विधायकों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए थे। बाद में तीन और कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ली। भाजपा ने इन सभी 25 दल-बदल करने वाले पूर्व विधायकों को उम्मीदवार बनाने का फैसला ले लिया है। इससे पार्टी में असंतोष है। बमौरी से के एल अग्रवाल, ग्वालियर पूर्व से सतीश सिकरवार और सुरखी से पारुल साहू पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। इन तीनों को कांग्रेस ने उम्मीदवार भी बनाया है। वहीं कई अन्य नेताओं में भी नाराजगी है।

भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता देवास के हाटपिपल्या विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी को लेकर थी। जोशी से कांग्रेस लगातार संपर्क बनाए हुए थी और जोशी का भी मन डांवाडोल था। बीती रात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी मुलाकाता हुई, उनके क्षेत्र के कार्यकर्ता भी थे। चौहान ने सभी को भरोसा दिलाया कि उनके मान-सम्मान का ख्याल रखा जाएगा।

इस मुलाकात के बाद जोशी ने भी कहा कि वे कहीं नहीं जाने वाले हैं, यह बात सही है कि उनके मन में पिछले कुछ दिनों से कई विचार आ रहे थे।

वहीं भाजपा के अंदर खाने कई और नेताओं में भी असंतोष है, उन्हें भी पार्टी एक-एक कर मनाने में लगी है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में बगावत का दौर जारी है। पहले 25 विधायकों ने पार्टी छोड़ी और उसके बाद भी कांग्रेस छोड़ने वालों की सूची लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में पूर्व मंत्री महेंद्र बौद्घ और ग्वालियर के वरिष्ठ नेता अशोक शर्मा ने भी पार्टी छोड़ी है।

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