Monday , December 11 2017

ममता बनर्जी का फ़ैसला तारीख़ साज़

ममता बनर्जी का फ़ैसला जिसमें उन्होंने अपने ही पार्टी के रुकन पार्लीमेंट को इस के वज़ारती ओहदा से अलहदा कर देने की वज़ीर-ए-आज़म से ख़ाहिश की है, आज़ाद हिंदूस्तान की तारीख़ में कोई मिसाल नहीं रखता। इस तरह से उसे एक तारीख़ साज़ फ़ैसला कहा जा

ममता बनर्जी का फ़ैसला जिसमें उन्होंने अपने ही पार्टी के रुकन पार्लीमेंट को इस के वज़ारती ओहदा से अलहदा कर देने की वज़ीर-ए-आज़म से ख़ाहिश की है, आज़ाद हिंदूस्तान की तारीख़ में कोई मिसाल नहीं रखता। इस तरह से उसे एक तारीख़ साज़ फ़ैसला कहा जा सकता है।

इनके इस फ़ैसला से वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह का मौक़िफ़ भी नाज़ुक हो गया है और ये सूरत-ए-हाल भी अदीमुल मिसाल है। मर्कज़ी हुकूमत को ख़ानाजंगी का सामना है जिससे इसके इस्तेहकाम पर मनफ़ी असर मुरत्तिब हो सकता है।

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