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ममता बनर्जी के लिए ज़बरदस्त धक्का

तृणमूल कांग्रेस सरबराह और वज़ीर-ए-आला मग़रिबी (पश्चिमी) बंगाल ममता बनर्जी को आज एक धक्का उस वक़्त लगा जब उनकी सबसे बड़ी हामी (दोस्त) और रियासत ( राज्य) की मारूफ़ मुसन्निफ़ा (मशहूर लेखिका) महा स्वेता देवी ने बंगला एकेड्मी की सदर नशीन के ओहद

तृणमूल कांग्रेस सरबराह और वज़ीर-ए-आला मग़रिबी (पश्चिमी) बंगाल ममता बनर्जी को आज एक धक्का उस वक़्त लगा जब उनकी सबसे बड़ी हामी (दोस्त) और रियासत ( राज्य) की मारूफ़ मुसन्निफ़ा (मशहूर लेखिका) महा स्वेता देवी ने बंगला एकेड्मी की सदर नशीन के ओहदा से इस्तीफ़ा दे दिया।

यहां इस बात का तज़किरा ( चर्चा/ ज़िकर) ज़रूरी है बंगाल की चंद गिनी चुनी दानिश्वरों (में शुमार की जाने वाली महाश्वेता देवी को कुछ अर्सा क़बल ममता बनर्जी बंगला एकेडेमी का सदर नशीन मुक़र्रर किया था और अब इन का यूं इस तरह मुस्ताफ़ी ( बर्खास्त/ हट जाना) हो जाना ये ज़ाहिर करता हैकि ममता बनर्जी की मक़बूलियत इन्हितात ( हार) पज़ीर (कुबूल/ स्वीकार करने वाला) है।

महा श्वेता देवी एक मारूफ़ मुसन्निफ़ा (मशहूर लेखिका) के इलावा मैग्सेसे ऐवार्ड याफ्ता भी हैं। उन्हों ने हाल ही में बावक़ार (सम्मानित) विद्या सागर एवार्ड किसी नौजवान मुसन्निफ़ (लेखक) को मुंतख़ब (चुने जाने) किए जाने की वकालत की थी, जिसे हुकूमत ने मुबय्यना तौर पर मुस्तर्द ( रद्द) कर दिया था।

महाश्वेता देवी के ब्यान के मुताबिक़ उन्होंने एवार्ड के लिए नौजवान नसल से ताल्लुक़ रखे जने वाले दो मुसन्निफ़ों (मशहूरों) के नामों की सिफ़ारिश की थी, लेकिन इन की सिफ़ारिश को बालाए ताक़ रखते हुए कुछ दीगर(दूसरे)लोगों को एवार्ड दिए गए।

इसलिए मैंने इस्तीफ़ा पेश कर दिया है। एकेड्मी के इजलास ( सभा) में नौजवान मुसन्निफ़ों ( लेखको) को इनाम दिए जाने पर इत्तिफ़ाक़ राय ( सहमती की राय) मौजूद थी, लेकिन उन्हें (महाश्वेतादेवी) ये नहीं मालूम हो सका कि आख़िरी लम्हात ( क्षणो) में वो क्या वजूहात ( कारण/ वजहें) थीं, जिन की बुनियाद पर दो मुसन्निफ़ों (लेखको‍,) में से एक मुसन्निफ़ का नाम क़तई फ़हरिस्त (List) से ख़ारिज (हटा देना) कर दिया गया।

यहां इस बात का तज़किरा दिलचस्पी से ख़ाली ना होगा कि महाश्वेता देवी ने 2011 असेंबली इंतेख़ाबात (विधान सभा चुनाव) के दौरान ममता बनर्जी की ज़बरदस्त ताईद (मदद/ हिमायत) की थी, लेकिन हालिया दिनों में दोनों अहम ख़वातीन के माबैन ताल्लुक़ात ( आपसी संबंध) उस वक़्त नाख़ुशगवार हो गए जब एक सियोल राईट ग्रुप को जिसे महा श्वेता देवी की ताईद हासिल की थी, इजलास मुनाक़िद ( सभा आयोजित) करने से रोक दिया गया था।

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