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ममता बनर्जी: साफ छवि के आगे विपक्ष का इल्ज़ाम टिक नहीं पाया

हमेशा से गरीबों के हित की बात करने वाली दीदी ने वैसे तो शारदा घोटाले में गरीब लोग के बहुत सारे पैसों को पता नहीं कौन से कोने में लुप्त करवा दिया। लेकिन फिर जनता ने उसका साथ नहीं छोड़ा। यह तो एक प्रेमी प्रेमिका वाला हाल है। तुम मेरे साथ जितनी मर्जी वफा करो मैं तुम्हारे साथ कभी धोखा नहीं करूंगा। भले इसके लिए मेरी जान ही क्यों न चली जाए। वैसे हुआ भी कुछ वैसा ही है कि अप्रैल की शुरूआती महीने में कोलकाता के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले इलाके में फुट ओवर ब्रिज गया कई लोगों की जान चली गई। लेकिन लोगों ने दीदी के साथ धोखा नहीं किया और आखिरकार छोटी कद की दीदी को बड़ी गद्दी पर बैठा ही दिया।

दीदी जब से सत्ता में आई है, सिर्फ एक ही नारा लगाती रहती है। “मां, माटी, माटी” और इसी के बल पर वह गरीब जनता के दिल पर राज करती है। गरीब जनता को तो सिर्फ मां,माटी,मानुष ही समझ में आता है। लेकिन वह उसके भीतरी सच को समझने की कोशिश भी नहीं करता है।

आम जनता के पास इतना समय नहीं होता है कि वह नेता की चिकनी चुपड़ी बात पर दिमाग लगाए वो तो बस चुनाव से पहले आकर नेता जी ने जो कह दिया सब उसी के बहकावे में आकर वोट कर देते है। हाथ जोड़ लोगों से वोट मांगते नेता द्वारा किए गए वायदे ही सही लगाते है।

खैर, दीदी ने जनता से जो वायदों किए वो सारे तो पूरे नहीं कर पाई, लेकिन गरीब जनता के पेट के रास्ते से सत्ता में आ ही गई। मुझे अभी भी याद है जब पिछली बार दीदी सत्ता में आई थी, तो आते हैं जनता के पेट रास्ते से एंट्री की थी। सबसे पहला काम गरीब लोगों के बीच चावल बटवाएं थे। इस बार देखते हैं कि दीदी ऐसा क्या कमाल करती है जिससे कि वह दोबारा सत्ता में आ जाए।

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