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मरने से पहले मेरे बाल डाई कर देना : ओम पुरी

नई दिल्ली : बॉलिवुड के शानदार अभिनेता में गिने जाने वाले ऐक्टर ओम पुरी अब इस दुनिया में नहीं रहे। 66 साल के ऐक्टर की मौत हार्ट अटैक की वजह से हो गई है। ओम पुरी का किरदार हमेशा से ही हर फिल्म में मजबूत नज़र आया। अपनी ऐक्टिंग के अलावा अपने इन डायलॉग की वजहों से भी याद किए जाते हैं ओमपुरी। उनकी शानदार फिल्मों में फिल्म आवारा पागल दीवाना में ओम पुरी का डायलोग याद आता है : मरने से पहले मेरे बाल डाई कर देना, आई वॉन्ट टु डाई यंग उनकी कुछ और फिल्में ‘आक्रोश’, ‘अर्धसत्य’, ‘जाने भी दो यारो’, ‘घायल’, ‘ और ‘चुपके चुपके’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

हाल ही में एनबीटी से हुए बातचीत में ओम पुरी ने कहा, ‘मैं पिछले 40 साल से इंडस्ट्री में काम कर रहा हूं लेकिन ‘खान’ नहीं बन पाया।’ हालांकि बाद में उन्होंने कहा, ‘मैं यह बात मजाक में कह रहा था। सभी खान मेरे दोस्त हैं और सलमान के साथ तो अभी-अभी ‘ट्यूबलाइट’ की शूटिंग पूरी की है।’

एक इंटरव्यू में ओम पुरी ने कहा था, ‘मेरे पिता रेलवे में आने से पहले फौज में थे। रेल भी मेरे दिल के काफी करीब रही है लेकिन वास्तव में, मैं एक फौजी बनना चाहता था।’ हालांकि, अभी कुछ महीने पहले ही ओम पुरी फौज के एक शहीद जवान के ऊपर कॉमेंट करने के बाद ही विवादों में घिर गए थे। एक टीवी चैनल की लाइव डिबेट में ओम पुरी ने कहा, ‘उनसे (शहीद फौजी) से किसने कहा था कि सेना में भर्ती हों और हथियार उठाएं।’ इस कॉमेंट के बाद सोशल मीडिया में भी लोगों ने ओम पुरी की आलोचना की थी। हालांकि बाद में ओम पुरी ने अपने कॉमेंट के लिए माफी मांगी थी और उन्होंने शहीद के परिवार से मिलकर माफी भी मांगी थी।

पद्मश्री से पुरस्कृत ओम पुरी सीरियस सिनेमा के अलावा कमर्शल सिनेमा के भी शौकीन थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘मैंने इतनी सीरियस फिल्में की हैं कि मेरे जाने के बाद भी आरकाइव में देखने और सीखने के लिए 50-60 फिल्में होंगी। मुझे अखरता है कि अब उस तरह के किरदार नहीं आते लेकिन मैं लोगों को हंसाकर भी खुश हूं। आर्ट सिनेमा से मुझे पहचान मिली और पूरी दुनिया घूमा। हर बड़े फेस्टिवल में मेरी फिल्में जाती थीं। मैं दोनों सिनेमा का ऋणी हूं। मेरी इच्छा है कि मैं और अच्छी कमर्शल फिल्में करूं।’

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