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मर्कज़ी वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर की कारकर्दगी पर तन्क़ीद : तंज़ीम इंसाफ़

हैदराबाद २३मार्च : ( तंज़ीम इंसाफ़ ने मर्कज़ी वज़ारत अक़ल्लीयती उमूरकी कारकर्दगी को सख़्त तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि अक़ल्लीयतों के लिए मुख़तस 587 करोड़ रुपय फंड्स की वापसी वज़ारत की ना अहली वज़ीर की काहिली महिकमा की सुस्त

हैदराबाद २३मार्च : ( तंज़ीम इंसाफ़ ने मर्कज़ी वज़ारत अक़ल्लीयती उमूरकी कारकर्दगी को सख़्त तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि अक़ल्लीयतों के लिए मुख़तस 587 करोड़ रुपय फंड्स की वापसी वज़ारत की ना अहली वज़ीर की काहिली महिकमा की सुस्त रवी को ज़ाहिर करती है । ब्यान में कहा गया कि जब मर्कज़ी हुकूमतवज़ारत अक़ल्लीयती उमूर के ज़रीया अक़ल्लीयतों की फ़लाह-ओ-बहबूदगी से मुताल्लिक़असकीमात की अमल आवरी नाकाम रहती है तो फिर किस तरह अक़ल्लीयतों के रूट की तवक़्क़ुआत रख सकती है ।

अफ़सोसनाक पहलू ये है कि कमीयूनिसट जमातों की जानिबसे सच्चर कमेटी रिपोर्ट की भी अमल आवरी में हुकूमत पूरी तरह नाकाम रही । तंज़ीमइंसाफ़ के क़ाइदीन जनाब सय्यद अली उद्दीन अहमद , जनाब मीर अहमद अली , जनाब मीर मक़सूद अली और जनाब सय्यद हमीद उद्दीन अहमद महमूद ने कहा कि पारलीमानी स्टडिंग कमेटी की तन्क़ीद से इस बात का पता चलता है कि वज़ारत अक़ल्लीयती बहबूदकी ब्यूरोक्रेसी में कई खामियां पाई जाती हैं जो पराजकटस प्रोग्रामों की अमल आवरी पर रोक लगाते हुए और फंड्स का सही इस्तिमाल ना करते हुए अक़ल्लीयतों की पसमांदगी को जूं का तूं बरक़रार रखते हैं । इन हालात में अगर अक़ल्लीयतें कांग्रेस वोट बंक से कनाराकश होती हैं तो इस पर कोई ताज्जुब नहीं किया जाना चाहिए ।।

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