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मर्कज़ और हुकूमत बिहार को अव्वाम की सलामती का कोई एहसास नहीं : कीर्ति आज़ाद

साबिक़ क्रिकेटर और बी जे पी लीडर कीर्ति आज़ाद ने आज मर्कज़ी हुकूमत और बिहार की रियासती हुकूमत को तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि दोनों ही अव्वाम की सलामती से बे परवाह हैं जिस का एक सबूत हम ने कल शाम पटना में नरेंद्र मोदी की हुंकार

साबिक़ क्रिकेटर और बी जे पी लीडर कीर्ति आज़ाद ने आज मर्कज़ी हुकूमत और बिहार की रियासती हुकूमत को तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि दोनों ही अव्वाम की सलामती से बे परवाह हैं जिस का एक सबूत हम ने कल शाम पटना में नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली के दौरान देखा और वो भी उस वक़्त जब कि तीन माह क़बल ही हमें मालूम था कि पटना में ऐसा कुछ होसकता है।

मोदी को Z पुलिस सेक्योरिटी दस्तयाब है लेकिन बसकोमोनि भवन से सिर्फ़ 300 मीटर के फ़ास्ले पर एक ताक़तवर बम रखा गया था, अगर वो फट गया होता तो शायद हम सब आज ज़िंदा ना होते। में सिर्फ़ मर्कज़ी हुकूमत और बिहार की रियासती हुकूमत से ये पूछना चाहता हूँ कि बोध गया धमाकों के बाद क्या हुआ? हुकूमत ने कहा था कि हमें वक़्त दीजिए। कितना वक़्त दिया जाये।

महीनों गुज़र चुके हैं लेकिन कोई नतीजा बरामद नहीं हुआ जिस से ये ज़ाहिर होता है कि दोनों ही हुकूमतों को अव्वाम की सलामती का कोई एहसास नहीं। गांधी मैदान में हुए सिलसिला वार बम धमाकों में छः अफ़राद हलाक हुए हैं। वज़ीर-ए-आला बिहार नीतीश कुमार ने भी धमाकों की ज़बर्दस्त मुज़म्मत की और कहा कि इस के पसेपुश्त रियासत के अमन को दरहम ब्रहम करना था।

लिहाज़ा ज़रूरत इस बात की है कि मुल्क के तमाम क़ाइदीन अपनी सियासी वफ़ादारियों और इख़तिलाफ़ात को बालाए ताक़त रखते हुए मुत्तहिद होजाएं क्योंकि अस्करियत पसंदों के ख़िलाफ़ लड़ाई सिर्फ़ मुत्तहिद रह करहि जीती जा सकती है। उन्होंने महलूकीन् के अरकान ख़ानदान केलिए फ़ी ख़ानदान पाँच लाख रुपये की उबूरी इमदाद का ऐलान किया।

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