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मर्दों में आरज़ा क़्लब बाप से मुंतक़िल होता है: तहक़ीक़

मर्दों में ख़वातीन की निसबत हार्ट अटैक के ज़्यादा ख़तरात होते हैं, मर्दों में आरज़ा-ए-क़्लब अपने बाप से मुंतक़िल होता है, दुनिया भर में हर तीन आरज़ा-ए-क़्लब में मुबतिला अफ़राद में दो मर्द हैं।

मर्दों में ख़वातीन की निसबत हार्ट अटैक के ज़्यादा ख़तरात होते हैं, मर्दों में आरज़ा-ए-क़्लब अपने बाप से मुंतक़िल होता है, दुनिया भर में हर तीन आरज़ा-ए-क़्लब में मुबतिला अफ़राद में दो मर्द हैं।

ख़वातीन के मुक़ाबले मर्दों में ये मर्ज़ 10 से 15 साल क़बल ही ज़ाहिर हो जाता है जिस की वजह जनयाती तौर पर DNA का एक जुज़ वाई (Y) क्रोमोसोम जो सिर्फ मर्दों में ही पाया जाता है। मग़रिबी मीडीया की रिपोर्टस के मुताबिक़ आरज़ा-ए-क़्लब लापरवाह तर्ज़-ए-ज़िदंगी, सिगरेट नोशी और नाक़िस ग़िज़ा की वजह से ही नहीं होता बल्कि डी एन ए भी इस के लाहक़ होने की अहम वजह है। तहक़ीक़ में एक दिलचस्प पहलू ये सामने भी आया कि इस वजूह का भी पता चलेगा कि शुमाल मग़रिबी योरोपी मर्दों को दुनिया के दीगर हिस्सों से ज़्यादा क्यों दिल का दौरा पड़ता है।

डी एन ए के तजज़िये से ज़ाहिर हुआ है कि 90 फ़ीसद मर्दों के दोनों वाई करोमसोम में से एक मुशतर्का ख़ुसूसीयात का हामिल होता है जिसे Haplogroup I और Haplogroup R1b1b2 कहा जाता है। हीपलो ग्रुप वन 20 फ़ीसद बर्तानवी मर्दों में पाया जाता है जो दूसरे मर्दों की निसबत पचास फ़ीसद हार्ट अटैक का सबब बनता है और मदाफ़अती निज़ाम पर असरअंदाज़ होता है।

मर्दों से वाई क्रोमोसोम्ज़ के बेटों को मुंतक़िल होता है जबकि ख़वातीन को अपनी माँ के दो ऐक्स X क्रोमोसोम्ज़ में से एक और बाप की तरफ़ से एक ऐक्स क्रोमोसोम मिलता है। ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के डाक्टर हेलन विल्सन ने यूनीवर्सिटी आफ़ लेस्टर की इस तहक़ीक़ को ख़िराज-ए-तहिसीन पेश करते हुए अहम संग-ए-मेल क़रार दिया और कहाकि तिब्बी साईंस में आरज़ा-ए-क़्लब में मुबतला अफ़राद के ईलाज मुआलिजे में इस तहक़ीक़ से फ़न्नी राहें खुलने का इमकान है। ये तहक़ीक़ तीन हज़ार से ज़ाइद अफ़राद पर की गई जिसे तिब्बी जरीदे दी लीनसेट में शाय किया गया है।

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