Thursday , February 22 2018

मर्सी सदर मुंतख़ब,ईरान से बेहतर ताल्लुक़ात के ख्वाहाँ

मिस्र के इस्लाम पसंद सदर मुंतख़ब मुहम्मद मर्सी ने ईरान की फ़ारस ख़बर रसां एजैंसी को एक इंटरव्यू में कहा है कि वो इस ख़ित्ता में स्ट्रेटेजिक तवाज़ुन(बैलेंस) बरक़रार रखने के लिए हुकूमत ईरान के साथ ताल्लुक़ात को वुसअत (बढावा) देने के

मिस्र के इस्लाम पसंद सदर मुंतख़ब मुहम्मद मर्सी ने ईरान की फ़ारस ख़बर रसां एजैंसी को एक इंटरव्यू में कहा है कि वो इस ख़ित्ता में स्ट्रेटेजिक तवाज़ुन(बैलेंस) बरक़रार रखने के लिए हुकूमत ईरान के साथ ताल्लुक़ात को वुसअत (बढावा) देने के ख़ाहिशमंद हैं। आज उन का ये इंटरव्यू शाय हुआ है।

दोनों मुल्कों के दरमयान सिफ़ारती ताल्लुक़ात ज़ाइद अज़ 30 बरसों से मुनक़ते(कटा हुवा) हैं लेकिन गुज़श्ता साल एक अवामी शोरिश के बाद मिस्र के सदर हसनी मुबारक की माज़ूली के बाद से दोनों फ़रीक़ों ने अपनी अपनी पालिसी में तबदीली के इशारे दिए हैं। फ़ारस ने मिस्टर मर्सी के अलफ़ाज़ दुहराते हुए कहा है कि ईरान के साथ बेहतर ताल्लुक़ात इस ख़ित्ता में दबाओ का तवाज़ुन(बैलेंस) बनाएंगे और ये काम मेरे प्रोग्राम का हिस्सा है।

मुहम्मद मर्सी के इस ब्यान से मग़रिबी ताक़तें बेचैन हो सकती हैं क्योंकि वो ईरान को इस के मुतनाज़ा न्यूकलीयाई प्रोग्राम के सिलसिले में सब से अलग थलग करके यक्का-ओ-तन्हा करदेना चाहती हैं। मग़रिबी ताक़तों को शुबा है कि ईरान अपने न्यूकलीयाई प्रोग्राम के तहत ऐटम बम बनाने में मसरूफ़ है।

मग़रिब (पश्चिम) ने इस जमहूरी (लोकतांत्रिक) अमल का ख़ौरमक़दम किया है, जिस के सिलसिले की एक कड़ी सदारती इंतिख़ाब (चुनाव)और मुहम्मद मर्सी की जीत है लेकिन ये बात खुल कर कही है कि मिस्र का इस्तिहकाम उन की असल तर्जीह है।

फ़ारस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मिस्र के सदारती इंतिख़ाबात के नताइज का ऐलान होने से चंद घंटे पहले मर्सी ने ये बातें कही हैं। इन के इस इंटरव्यू का पूरा मतन बाद में किसी वक़्त छापा जाएगा। इन से जब इस तरह की रिपोर्टों पर राय ज़ने के लिए कहा गया कि उन्हों ने ऐलान किया है कि अगर वो सदर मुंतख़ब होगए तो सब से पहले सऊदी अरब का दौरा करेंगे जो कि इस ख़ित्ता में ईरान का कट्टर मुख़ालिफ़ है तो मिस्टर मर्सी ने कहा कि मैंने ऐसी कोई बात नहीं की है।

उन्हों ने वाज़ेह किया कि अभी तक ये तै नहीं है कि सदर का ओहदा जीत जाने के बाद मेरा पहला ग़ैर मुल्की दौरा किस मुल्क का होगा। मिस्र के पहले आज़ादाना सदारती इंतिख़ाब (चुनाव) में साबिक़ फ़ौजी जनरल अहमद शफ़ीक़ पर मुहम्मद मर्सी की जीत का ईरान ने ये कह कर ख़ैर मक़दम किया है कि ये जमहूरीयत (लोकतांत्रिक) का शानदार का मुज़ाहरा है
जिस में इस्लामी बेदारी का हतमी मरहला उजागर हुआ है। सुन्नी मुस्लमानों की अक्सरीयत वाला मुलक मिस्र और शीया मुस्लमानों की अक्सरीयत वाला मुलक ईरान दोनों मशरिक़ वुसता के इंतिहाई बाअसर ममालिक (देशों) हैं।

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