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मलेशीया : अनवर इब्राहिम हमजिंस परस्ती के मुक़द्दमा में बरी

कुवाला लुम्पुर, १० जनवरी (पी टी आई) मलेशिया की हाइकोर्ट ने आज अपोज़ीशन लीडर अनवर इब्राहीम को हमजिंस ताल्लुक़ात के इल्ज़ामात से जो इस ने मुबय्यना तौर पर अपने साबिक़ क़रीबी बाएतिमाद साथी से क़ायम किए थे, दो साल तवील मुक़द्दमा के बाद बरी

कुवाला लुम्पुर, १० जनवरी (पी टी आई) मलेशिया की हाइकोर्ट ने आज अपोज़ीशन लीडर अनवर इब्राहीम को हमजिंस ताल्लुक़ात के इल्ज़ामात से जो इस ने मुबय्यना तौर पर अपने साबिक़ क़रीबी बाएतिमाद साथी से क़ायम किए थे, दो साल तवील मुक़द्दमा के बाद बरी कर दिया।

इस फ़ैसला से इमकान है कि आम इंतिख़ाबात से क़बल उन के सयासी इत्तिहाद को तक़वियत मिलेगी। हाइकोर्ट के जज जस्टिस ज़बीह उद्दीन मुहम्मद ने पर हुजूम कमरा-ए- अदालत में अपना फ़ैसला सुनाने में सिर्फ तीन मिनट का वक़्त सिर्फ़ किया, जिस का एक तवील मुद्दत से इंतिज़ार किया जा रहा था।

उन्हें अपने साबिक़ क़रीबी बाएतिमाद साथी 26 साला मुहम्मद सैफ-उल्लाह बुख़ारी के साथ ग़ैर फ़ित्री जिन्सी ताल्लुक़ात उस्तिवार करने के जुर्म से बरी क़रार दिया। जज ने कहा कि सैफ-उल्लाह के ब्यान की ताईद में कोई और शहादत दस्तयाब नहीं हुई। उन्हों ने डी एन ए शहादत का भी ज़िक्र करते हुए इसे नाक़ाबिल भरोसा क़रार दिया।

जज ने कहा कि अदालत सौ फ़ीसद यक़ीन के साथ नहीं कह सकती कि डी एन ए आलूदा नहीं है। चूँकि ये जिन्सी जुर्म है इस लिए किसी तोसीक़ी शहादत की अदमे मौजूदगी में अदालत मुल्ज़िम को मुजरिम क़रार देने से गुरेज़ कर रही है।

64 साला अनवर के हामीयों ने फ़ैसला सुन कर अल्लाह अकबर के नारे लगाए। अनवर इब्राहीम ने फ़ैसला सुनने के बाद वकलाए इस्तिग़ासा से मुसाफ़ा भी किया। मुसर्रत से सरशार अनवर इब्राहीम ने कहा कि अल्हम्दुलिल्लाह आख़िर कार इंसाफ़ ग़ालिब आया है।

उन्होंने कहा कि उन्हें फंसाया गया था और वो कुछ हैरतज़दा भी थी। अब वो अपनी तवानाई आइन्दा इंतिख़ाबात पर मर्कूज़ करेंगे। ये फ़ैसला 2013-ए-में मुक़र्रर आम इंतिख़ाबात से क़बल मंज़र-ए-आम पर आया है। ये भी तवक़्क़ो हीका ये इंतिख़ाबात जारीया साल के अवाख़िर में मुनाक़िद किए जाएंगे।

अनवर इब्राहीम पर इल्ज़ामात 2008 में मुनाक़िदा इंतिख़ाबात के चंद माह बाद ही मंज़र-ए-आम पर आए थी, जिस में इन की ज़ेर-ए-क़ियादत अपोज़ीशन के अदीमुल्मिसाल कामयाबी हासिल की और बरसर-ए-इक़तिदार इत्तिहाद को नुक़्सान पहुंचाया था।

इस मुक़द्दमा से मलेशिया को धक्का पहुंचा और हुकूमत पर इल्ज़ामात आइद किए गए थे कि अनवर इब्राहीम ज़ेर-ए-क़ियादत अपोज़ीशन को कुचल देना चाहती है।

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