मलेशीया मैं हदूद क़ानून लागू करने का इमकान मुस्तर्द, वज़ीर-ए-आज़म नजीब का ब्यान

मलेशीया मैं हदूद क़ानून लागू करने का इमकान मुस्तर्द, वज़ीर-ए-आज़म नजीब का ब्यान

कवाला लमपुर, 25 सितंबर (पी टी आई) मलाइशयाई वज़ीर-ए-आज़म नजीब रज़्ज़ाक़ ने इस हमा मज़ाहिब वाले मुल्क में क़ानून इस्लामी हदूद लागू करने का इमकान आज ये कहते हुए मुस्तर्द करदिया कि अगरचे ये अल्लाह का क़ानून है लेकिन इस पर अमल आवरी केलिए हक़ायक़ प

कवाला लमपुर, 25 सितंबर (पी टी आई) मलाइशयाई वज़ीर-ए-आज़म नजीब रज़्ज़ाक़ ने इस हमा मज़ाहिब वाले मुल्क में क़ानून इस्लामी हदूद लागू करने का इमकान आज ये कहते हुए मुस्तर्द करदिया कि अगरचे ये अल्लाह का क़ानून है लेकिन इस पर अमल आवरी केलिए हक़ायक़ पर इन्हिसार की ज़रूरत है। जहां अप्पोज़ीशन लीडर अनवर इबराहीम ने हाल में इस क़ानून पर अमल आवरी की ताईद की थी, वहीं वज़ीर-ए-आज़म ने कहा कि पहले से ही सिस्टम में हदूद के अनासिर मौजूद हैं जिस में से इंतिहा पसंदाना हिस्सा हज़फ़ है। अगर हम उल्मा से पूछें तो (मालूम होगा कि) इस्लामी क़ानून पर अमल आवरी नहीं होसकती तावक़तीके हम दस्तयाब माहौल और हक़ायक़ को मल्हूज़ ना रखें, नजीब ने ये बात कही और निशानदेही की कि अगरचे ये क़ानून ख़ुदाई क़ानून है लेकिन इस पर अमल आवरी केलिए हक़ायक़ को असास बनाने की ज़रूरत रहती है। मलेशीया कसीर नसली मुलक है जिस में मुस्लिम माले आबादी की अक्सरीयत हैं, लेकिन आबादी में नसलन चीनी और नसलन हिंदूस्तानियों का क़ाबिल लिहाज़ तरतीबवार 25 फ़ीसद और 8 फ़ीसद हिस्सा ही। क़ानून हदूद मुल्क में काबिल-ए-क़बूल बरताव की हदें और जराइम केलिए सज़ा को ब्यान करता है।

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