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मसला कश्मीर सयासी मुस्तक़बिल का मसला: मीर वाइज़ उमर‌ फ़ारूक़

एतिदाल पसंद हुर्रियत कान्फ्रेंस‌ के सदर नशीन मीर वाइज़ उमर‌ फ़ारूक़ ने कहा कि मसला-ए-कश्मीर, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के दरमि यान कोई इलाक़ाई या सरहदी तनाज़ा नहीं बल्कि कश्मीरीयों के सियासी मुस्तक़बिल का मसला है। ख़ूनी लकीर हमारे

एतिदाल पसंद हुर्रियत कान्फ्रेंस‌ के सदर नशीन मीर वाइज़ उमर‌ फ़ारूक़ ने कहा कि मसला-ए-कश्मीर, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के दरमि यान कोई इलाक़ाई या सरहदी तनाज़ा नहीं बल्कि कश्मीरीयों के सियासी मुस्तक़बिल का मसला है। ख़ूनी लकीर हमारे लिए नाक़ाबिल-ए-क़बूल है।

जामि मस्जिद श्रीनगर में एक इजतिमा से ख़िताब करते हुए उन्होंने कहा कि जहां तक जम्मू-ओ-कश्मीर के मसला का ताल्लुक़ है, ये तो क़ियादत के हुसूल के लिए है, ना कि हुकूमत के क़ियाम के लिए। ये मसला जम्मू-ओ-कश्मीर के हुदूद‌ में रहने वाले एक करोड़ 20 लाख अवाम के सियासी मुस्तक़बिल का है।

उन्होंने कहा कि मसला-ए-कश्मीर के ताल्लुक़ से हुर्रियत कान्फ्रेंस‌ और जम्मू-ओ-कश्मीर अवामी मजलिस-ए-अमल का मौक़िफ़ और नज़रिया बिलकुल साफ़ और वाज़िह है कि जिस कश्मीर को ख़ून से सींचा हो, वो कश्मीर हमारा है। वज़ीर-ए-ख़ारजा के मसला-ए-कश्मीर पर इस बयान पर कि ये मसला हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के दरमियान दो तरफ़ा माम‌ला है, एक बार फिर सख़्ती के साथ मुस्तरद‌ करते हुए सदर नशीन हुर्रियत ने कहा कि तारीख़ और वाक़ियात इस बात के शाहिद हैं कि माज़ी में अब तक दो तरफ़ा मुज़ाकरात चाहे वो ताशकंद हो, शिमला हो, लाहौर हो या आगरा, बुरी तरह नाकाम हुए।

इसी लिए हमारा ये उसूली मुतालिबा है कि देरीना मसला बैन-उल-अक़वामी उसूलों के मुताबिक़ हल किया जाये।

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