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मसाजिद में जानमाज़ों की सफ़ाई है इन साहिब की ज़िंदगी का मिशन

नुमाइंदा ख़ुसूसी

नुमाइंदा ख़ुसूसी
हैदराबाद ०६अगस्त । इस्लाम दीन फ़ित्रत है और मुस्लमान इंतिहाई नफ़ासतपसंद पाकीज़गीका ख़्याल रखने वाला और दूसरों को पाक-ओ-साफ़ रहने माहौल को आलूदगी से महफ़ूज़ रखने की तरग़ीब देने वाला होता ही। मुस्लमानों में तहारत-ओ-पाकीज़गी का जो तसव्वुर है वो दुनिया के किसी मज़हब में नहीं मिल सकता। हमारे प्यारे रसूल सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम का इरशाद मुबारक है पाकी आधा ईमान ही इस हदीस पाक से अंदाज़ा होता है कि इस्लाम पाक-ओ-साफ़ रहने को कितनी एहमीयत देता है।

आप सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम ने उमत मुस्लिमा को हिदायत फ़रमाई है कि खाने से पहले अपने हाथ धो लिया करो और बाएं हाथ से हरगिज़ मत खाओ यहां तक कि पानी भी ना पियो। हुज़ूर सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम के इस इरशाद पाक के ऐन मुताबिक़ साईंस-ओ-तिब्ब इंसानों को मश्वरा देती है कि खाने से पहले हाथ धोलें वर्ना जरासीम से मुतास्सिर हो जाएगी। इस सिलसिला में अब तो बाज़ाबता टी वी चैनलो और अख़बारात में इश्तिहारात भी दिए जा रहे हैं।

बहरहाल एक मुस्लमान को अपने प्यारे नबी सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम के इरशाद मुबारक के मुताबिक़ ना सिर्फ ख़ुद को बल्कि अपने आस पास के माहौल को भी साफ़ सुथरा रखना ज़रूरी है। साफ़ सफ़ाई, पाकीज़गी और बेहतरीन पुरसुकून माहौल के लिए मसाजिद से बढ़ कर कोई मुक़ाम नहीं हो सकती। मुस्लमान मसाजिद में सफ़ाई का ख़ास ख़्याल रखते हैं और ख़ुशनसीब हैं वो लोग जो सिर्फ अपने रब ज़ूलजलाल और इस के प्यारे हबीब पाक सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम को राज़ी रखने के लिए मस्जिदों को साफ़ सुथरा रखने हमातन मसरूफ़ रहते हैं।

ऐसे ही ख़ुश नसीबों में 42 साला मीर असद अली साकन सुलतान शाही भी शामिल हैं। पेशा से आटो ड्राईवर मीर असद अली बड़ी ख़ामोशी से मसाजिद की जानमाज़ों की सफ़ाई का काम अंजाम देते हैं और इस काम को उन्हों ने अपनी ज़िंदगी का मिशन बना लिया ही। 10 बच्चों के बाप मीर असद अली आख़िरी दम तक अल्लाह के घरों की सफ़ाई का काम अंजाम देते रहने का अज़म मुसम्मम रखते हैं। क़ारईन! मस्जिद क़ुतुब शाही दरगाह दो पहाड़ शाह मिस्री गंज में नमाज़ ज़ुहर के बाद हम ने देखा कि एक साहिब Vaccume Cleaner लिए जानमाज़ों पर पड़ी धूल और गर्द को साफ़ कर रहे थे और वो अपने काम में इतने मसरूफ़ थे कि उन्हें पता ही नहीं था कि कोई उन पर नज़र रखे हुए है।

जब हमें किसी ने बताया कि अल्लाह का ये बंदा रज़ाकाराना तौर पर ये ख़िदमत अंजाम देता है तो हम ने सोचा कि क़ारईन को क्यों ना उस शख़्सियत से वाक़िफ़ करवाया जाए चुनांचे हम ने इस से बात की। मीर असद अली 1980 -ए-से आटो चलाते हैं और वो अपने आटो में हमेशा एक वैक्यूम‌ क्लीनर ज़रूर रखते हैं और जब भी मौक़ा मिलता है मसाजिद की जानमाज़ों को साफ़ करते हैं। इस तर्ज़ की ख़िदमत के बारे में पूछने पर उन्हों ने बताया कि साल 2001 -ए-में वो किसी मस्जिद में नमाज़ अदा कररहे थे जैसे ही सजदा में गए तो जानमाज़ से धूल-ओ-गर्द की बू आरही थी जिस से उन्हों ने काफ़ी बेचैनी महसूस की, कुछ और मसाजिद में इसी तरह के तजुर्बा का उन्हें सामना करना पड़ा।

तब असद अली ने तहय्या कर लिया कि वो मसाजिद में जानमाज़ों पर जो धूल गर्द जमा हो जाती है इस की सफ़ाई करेंगे चुनांचे सिर्फ स्कूल के बच्चों को लाने ले जाने वाले इन आटो ड्राईवर साहिब ने अपने घर के मसारिफ़ से रक़म बचाते हुए 450 रुपय में एक सैकिण्ड हैंड वैक्यूम‌ क्लीनर ख़रीदा और इस नेक काम का आग़ाज़ कर दिया।

थोड़े ही अर्से बाद ये मशीन ख़राब हो गया तब 700 रुपय में एक और वैक्यूम‌ क्लीनर ख़रीद कर अपने काम को जारी रखा। वो चूँकि रातिब का आटो चलाते हैं इस लिए सिर्फ इतवार को ही मसाजिद की सफ़ाई केलिए निकल पड़ते हैं। ना सिर्फ जानमाज़ों पर फैली गर्द-ओ-गुबार को साफ़ करते हैं बल्कि ज़रूरत पड़ने पर मसाजिद के हमाम-ओ-बाथ रूम्स की भी सफ़ाईकरदेते हैं।

इनके इस काम को देखते हुए एक साहिब ख़ैर ने सऊदी अरब से मीर असद अली को एक इंपोर्टेड वैक्यूम‌ क्लीनर लाकर दिया। 43 मसाजिद की फ़हरिस्त उन के पास ही। एक मस्जिद की सफ़ाई करने के बाद फिर सफ़ाई के लिए इस मस्जिद का नंबर तीन माह बाद आता है। अब कारपटस का चलन आम होगया है इस सिलसिला में वो कहते हैं, मेरा काम भी बढ़ गया है। पहले से बेहतर करने की ज़रूरत पड़ रही है। मीर असद अली के मुताबिक़ वो सिर्फ और सिर्फ अल्लाह और इस के रसूल सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम की रज़ा के लिए ये काम कर रहे हैं और हर नमाज़ के बाद अपनी दुआओं में अपने रब ज़ूलजलाल का वो इस बात के लिए शुक्र अदा करते हैं कि इस ने इस काम के लिए उन्हें मुंतख़ब किया है।

इन का ये भी कहना है कि छोटी मस्जिद 5 सफ़ की हो तो सफ़ाईकेलिए तीन घंटे लग जाते हैं। अगर मस्जिद बड़ी हो तो दो दिन भी लगते हैं। दोनों शहरों हैदराबाद-ओ-सिकंदराबाद की मसाजिद में वो ये नेक काम अंजाम देते हैं। जामि मस्जिद मुशयरा बाद और मस्जिद हकीम वज़ीर अली फ़तह दरवाज़ा चन्दू लाल बारहदरी में भीसफ़ाई का एज़ाज़ अल्लाह ने उन्हें बख्शा ही। मेहनत से गुरेज़ करने वालों के लिए सबक़ बने मीर असद अली ने साल 2007 -ए-में अपनी 85 साला ज़ईफ़ वालिदा के हमराह सआदतहज-ओ-रोज़ा रसूल सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम पर हाज़िरी की सआदत हासिल की।

उन्हें 7 लड़कियां और तीन लड़के हैं जिन में से तीन की शादियां हो चुकी हैं। एक बेटी बेवाही। वो अपने फ़र्ज़ंद और बेटी के साथ असद अली साहिब के हाँ ही मुक़ीम है। अब तीन लड़कीयां शादी के काबिल हैं। वो कहते हैं कि अल्लाह इंतिज़ाम करहि देता है। इन के दूसरे बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं। मीर असद अली का कहना है कि टैक्नोलोजी के साथ साथ काम की नौईयत भी बदल गई ही। अगर कोई मुहल्ला वारी सतह पर मस्जिद को साफ़ करने के लिए आगे आते हैं तो अच्छी बात है और कोई इन (असद अली) के साथ काम करना चाहता है तो वो उन से फ़ोन नंबर 9346944485 पर रब्त कर सकता है इस का ख़ौरमक़दम किया जाएगा।

मस्जिद क़ुतुब शाही दरगाह दो पहाड़ शाहऒ मिस्री गंज के एकमुसल्ली कामिल मुही उद्दीन जावेद ने मीर असद अली के जज़बा ख़िदमत को देख कर बताया कि उन्हों ने बहुत अच्छे काम का आग़ाज़ किया ही। अब चूँकि असरी मिशनरी आगई है हैदराबाद में एक ऐसी टीम हो जो इस तरह के काम का बीड़ा उठाए।

ऐसी मशीनें आगई हैं कि वो ना सिर्फ धूल गर्द साफ़ करती हैं बल्कि इस हिस्सा को धोकर वहीं सिखा भी देती हैं इस के लिए बाज़ाबता इस टीम को एक गाड़ी फ़राहम की जाय तो ये काम बेहतर अंदाज़ में हो सकता है। बहरहाल जो काम नेक नीयती से किया जाता है अल्लाह ताला उसे कामयाबी से हमकनार करता है।

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