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मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करेगा संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र: सूत्रों ने कहा, ‘आतंकवाद के खिलाफ पूरी दुनिया में बढ़ रहे आक्रोश’ के मौजूदा माहौल में ‘क्या चीन खुद को अलग-थलग रख सकता है’ और क्या वह एक ऐसे आदमी को आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश को रोक सकता है जो ऐसे संगठन का सरगना है जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 2001 में आतंकी संगठन घोषित किया था.’ उन्होंने कहा कि एक संभावना यह हो सकती है कि तकनीकी अड़ंगे की अवधि खत्म होने के बाद चीन अजहर से संबंधित आवेदन पर और समय मांग सकता है, जिससे कि तकनीकी अड़ंगा जारी रह सके. हालांकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य चीन से इस बारे में सवाल कर सकते हैं. सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य चीन से पूछ सकते हैं कि उसके तकनीकी अड़ंगे की वजह से छह महीने की अवधि मिलने के बाद उसे और समय क्यों चाहिए. जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र से आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिशों में चीन द्वारा लगाए गए तकनीकी अड़ंगे की छह महीने की वैधता जल्द ‘खत्म’ हो जाएगी और यदि बीजिंग भारत की कोशिश में फिर से अड़ंगा नहीं लगाता है तो पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड को प्रतिबंधित किया जा सकेगा. इस साल 31 मार्च को जैश-ए-मोहम्मद के सरगना पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के अंतर्गत प्रतिबंध लगवाने के भारत की कोशिश को परिषद के वीटो अधिकार प्राप्त स्थाई सदस्य चीन ने बाधित कर दिया था. पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में चीन ही एकमात्र ऐसा देश था, जिसने भारत के आवेदन पर अड़ंगा लगाया था, जबकि सभी 14 अन्य सदस्यों ने अजहर का नाम 1267 प्रतिबंध सूची में डालने के लिए भारत के प्रयास का समर्थन किया था.

अजहर का नाम इस प्रतिबंध सूची में आ जाने पर उसकी संपत्तियों को जब्त किया जा सकेगा और उस पर यात्रा प्रतिबंध लग जाएगा. सूत्रों ने बताया कि तकनीकी अड़ंगे की छह महीने की वैधता लगभग एक सप्ताह..10 दिन में ‘खत्म’ होने वाली है और यदि चीन दोबारा से किसी बहाने प्रस्ताव पर रोक की मांग नहीं करता या वीटो का इस्तेमाल नहीं करता तो अजहर को आतंकवादी घोषित करने की मांग वाला भारत का प्रस्ताव स्वत: पारित हो सकता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 14 अन्य सदस्य पहले ही भारत के प्रयास का समर्थन कर चुके हैं और तकनीकी अड़ंगे की अवधि खत्म होने तथा चीन की तरफ से दोबारा कोई आपत्ति नहीं किए जाने का आवश्यक रूप से यह मतलब होगा कि अजहर का नाम प्रतिबंध सूची में डालने की मांग का कोई विरोध नहीं है.

उन्होंने कहा कि अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आतंकी घोषित कराने की कोशिश में भारत अकेला नहीं है क्योंकि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने अजहर को आतंकी घोषित कराने के प्रस्ताव को ‘सह-प्रायोजित’ किया था. वर्तमान संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में 140 से अधिक देशों ने आम चर्चा में अपने संबोधन में आतंकवाद की कड़ी निन्दा की है और इससे लड़ने का संकल्प व्यक्त किया है. सूत्रों ने कहा कि क्या इस स्थिति में कोई देश (चीन) अपनी हठ पर कायम रहकर और अजहर को आतंकवादी घोषित कराने के प्रयास में अड़ंगा लगाकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की कोशिशों को मजबूत करने पर ‘वैश्विक आम सहमति’ के खिलाफ जाने का फैसला कर सकता है? आतंकवादियों का नाम प्रतिबंध सूची में न डाले जाने पर भारत ने बार-बार संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति की यह कहकर निन्दा की है कि यह एक ‘खामी’ और ‘पूरी तरह त्रुटिपूर्ण’ है कि प्रतिबंध समिति में आतंकवादी समूहों का नाम तो शामिल किया जाता है, लेकिन इन समूहों के सरगनाओं का नाम शामिल नहीं किया जाता.

सूत्रों ने कहा, ‘क्या ओसामा बिन लादेन अलकायदा से अलग है, क्या वे अलकायदा का नाम प्रतिबंध सूची में शामिल कर सकते हैं और लादेन का नहीं.’ संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने इस साल जून में कहा था कि यह ‘पूरी तरह त्रुटिपूर्ण’ है कि प्रतिबंधित संगठन तालिबान के नए नेता मावलावी हैबतुल्ला अखुंदजादी का नाम अब तक आतंकी व्यक्ति के रूप में शामिल नहीं किया गया है. इससे पहले भारत ने अजहर का नाम प्रतिबंध समिति में आतंकी के रूप में दर्ज कराने के अपने आवेदन पर तकनीकी अड़ंगा लगाए जाने के समय ‘चुनिंदा दृष्टिकोण’ अपनाने पर समिति की निन्दा की थी. भारत ने अप्रैल में कहा था कि उसे यह ‘समझ से बाहर’ लगता है कि पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद का नाम तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उसकी आतंकी गतिविधियों और अलकायदा से संबंधों के लिए 2001 में ही प्रतिबंध सूची में डाल दिया था, लेकिन समूह के सरगना, वित्तपोषक और लोगों को आतंकी गतिविधियों के लिए बरगलाने वाले व्यक्ति के नाम को तकनीकी अड़ंगे पर रखा गया है.

भारत ने अजहर के बारे में एक विस्तृत डोजियर दिया था और दो जनवरी के पठानकोट हमले के बाद इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति के समक्ष रखा था, लेकिन चीन ने इसमें तकनीकी अड़ंगा लगा दिया था और इस तरह अजहर का नाम प्रतिबंध सूची में नहीं डाला जा सका था. नई दिल्ली ने कहा था कि प्रतिबंध समिति आतंकवाद से लड़ाई के मामले में ‘चुनिंदा दृष्टिकोण’ अपना रही है. इसकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी बताते हुए भारत ने सुधारों का मजबूत आह्वान किया था.

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