मस्जिद अकसा और अन्य‌ मुक़द्दस मुक़ामात को वापिस हासिल करने के लिए ख़िलाफ़त लागु करना ज़रूरी

मस्जिद अकसा और अन्य‌ मुक़द्दस मुक़ामात को वापिस हासिल करने के लिए ख़िलाफ़त लागु करना ज़रूरी
* मस्जिद रहमत आलम में शुक्रवार कि नमाज से पहले इमाम मस्जिद अक़्सा प्रोफेसर शेख़ अबू मुहम्मद अलहमोदी का बयान‌

* मस्जिद रहमत आलम में शुक्रवार कि नमाज से पहले इमाम मस्जिद अक़्सा प्रोफेसर शेख़ अबू मुहम्मद अलहमोदी का बयान‌
हैदराबाद । मुस्लमानों में एकता और ख़िलाफ़त को दुबारा लागु करने के ज़रीये ही मस्जिद अक्सा और दुसरे मुक़ामात मुक़द्दसा के इलावा इस्लामी मुल्कों को यहूद‍ ओर नसारा के क़बजे से आज़ाद करवाया जा सकता है। एकता में ही मुस‌लमानों की बक़ा छिपी है वर्ना दुश्मन हमें आसानी से निशाना बना सकता है। इन हक़ीक़त पसंदाना ख़्यालात का इज़हार इमाम मस्जिद अल-अक़सा प्रोफेसर शेख़ अबू मुहम्मद अलहमोदी ने मस्जिद रहमत आलम बंजारा हिल्स‌ रोड नंबर 10 में शुक्रवार कि नमाज से पहले अपने बयान‌ में किया।

शेख़ अबू मुहम्मद अलहमोदी सदर नशीन इंडो अरब लीग सय्यद वक़ार उद्दीन कादरी की दावत पर सिर्फ एक दिन हैदराबाद आए हुए थे। शेख़ अलहमोदी ने अपने बयान को जारी रखते हुए कहा कि मुस‌लमान मस्जिद अकसा और अन्य‌ मुक़ामात मुक़द्दसा को वापिस हासिल करना चाहता है। आज दुनिया के हर ख़ित्ते में बसने वाले मुस‌लमान की यही ख़ाहिश हैकि जिन जिन इस्लामी मुल्कों पर इस्लाम के दुशमनों का कबजा हैं। इन मुल्कों को यहूद नसारा के चंगुल से आज़ाद कराया जाए।

मुस‌लमानों को दुश्मनों के ज़ुलम सितम से छुटकारा दिलाया जाए और दुनिया में निज़ाम ख़िलाफ़त क़ायम किया जाए। ये सब उसी वक़्त मुम्किन है जब मुस‌लमानों में एकता पैदा हो और निज़ाम ख़िलाफ़त क़ायम करने के जज़बे से उन के दिल सरशार होजाएं।

शेख़ अबू मुहम्मद अलहमोदी जो मस्जिद उकसा में क़ुरान और हदीस सीरत पर पिछ्ले 20 बरसों से सबक‌ देने का शरफ़ हासिल करते आरहे हैं। ब्यालोजी इन क्लीनिकल रिसर्च के शोबा में भी महारत रखते हैं। शेख़ ने ज़ोर देकर कहा कि मुस‌लमानों को मस्जिद अकसा को वापिस हासिल करने कि बहुत ख़ाहिश और तमन्ना है लेकिन क्या हम मुस‌लमानों ने कभी सोचा कि ख़िलाफ़त ही वो ताकत‌ है जिस के ज़रीये मस्जिद अकसा को वापिस हासिल किया जा सकता है और पुरि इस्लामी दुनीया में एक्ता की कितनी ज़रूरत है।

कुरानी आयात और अहादीस नबवी स.व. के हवाले देते हुए शेख़ ने कहा कि अल्लाह ताला क़ुरान मजीद में इरशाद फ़रमाता है ए ईमान वालो ! तुम सब मिल कर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड‌ लो और आपस में झगडें ना करो, अल्लाह की नेमत को याद करो जब तुम आपस में एक दूसरे के दुश्मन थे अल्लाह ने अपने रहम और करम से तुम को इस ने भाई भाई बना दिया। इस तरह हर मुस्लमान चाहे वो दुनिया के किसी मुल्क में मुक़ीम क्यों ना हो एक दूसरे को अपने भाई की हैसियत से देखता है और इस बात पर ख़ुश होता हैकि वो मेरा मोमिन भाई है।

शेख़ अलहमोदी ने कहा कि नबी करीम स.व. ने मदीना में इस्लामी हुकुमत‌ क़ायम करते हुए बिखरे हुए क़बिलों को एक कर‌ दिया। इन के दरमयान भाइचारगी और एकता क़ायम किया और इसी भाईचारगी की मिसाल सारी दुनिया में कहीं नहीं मिल सकती। शेख़ ने ये भी कहा कि हुज़ूर स.व. ने ख़ालिस शरीयत की बुनियाद पर एक एसा इस्लामी निज़ाम लागु किया जो इंसानों को बुराई से रोकता है। आपस में एकता और सलामती की दावत देता है।

निज़ाम ख़िलाफ़त कोई नई चीज़ नहीं है बल्कि वो मुक़द्दस निज़ाम हुकूमत है जिसे अल्लाह के रसूल स.व. ने लागु किया और ख़िलाफ़त के ज़रीये शरई निज़ाम की को जारी किया गया। शेख़ ने ये भी कहा कि मुस्लमान चाहे वो अफ़्ग़ानिस्तान में रहता हो या फिर मराक़िश में बस्ता हो, कलिमा की बुनियाद पर एक दूसरे का ईमानी भाई है और आज दुनिया में अमन सुकुन‌, समाजी‍ और माली, बराबरी और इंसानियत की जो बातें की जाती हैं दरअसल ये तमाम इस्लामी निज़ाम से लि गई हैं क्योंकि ये दुनिया का एकहि निज़ाम है जो इंसानों को दोज़ख़ से बचाता है, बुराईयों से महफ़ूज़ रखता है, ज़ुलम ज़्यादती रोकता है और हक़ीक़त में इंसान को इंसान बनाता है।

जहां तक ख़िलाफ़त का सवाल है ये इस्लामी निज़ाम पर अमल करने के लिए बनाया गया। इस्लामी तालीमात के बारे में इज़हार-ए-ख़्याल करते हुए शेख़ ने कहा कि समाजी, इक़तिसादी, सियासी और मज़हबी एतबार से इंसानों को मजबुत बनाता है। फिर एक बार ख़िलाफ़त की एहमीयत और फाइदों पर रोशनी डालते हुए शेख़ अलहमोदी ने कहा कि निज़ाम ख़िलाफ़त दरअसल उम्मत में एकता पैदा करता है क्योंकि इस्लाम में एकता की एहमीयत को सब स्विकार करते है।

सारी उम्मत को एक जिस्म से ताबीर किया गया है। हुज़ूर स.व. की बेसत से पहले जब अबराह अल्लाह के घर को ढाने के नापाक‌ मंसूबे के तहत हमलावर हुआ तब हज़रत अबदुलमुतलिब ने कहा कि हम इस बड़ी फ़ौज का मुक़ाबला नहीं कर सकते, लेकिन नबी करीम स.व. ने मुस्लमानों को एक थोडी मिक़दार में होने के बावजूद ये पैगाम दिया कि चाहे तुम्हारी तादाद कितनी ही थोडी क्यों ना हों अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकडे रहो। अल्लाह और इस के रसूल स.व. की इताअत करो और आपस में एकता से रहो तो फिर दुनिया की कोई भी ताक़त तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

शेख़ ने बड़े ही अफ़सोस के साथ कहा कि आज दुश्मनों ने मस्जिद अकसा पर जो क़बज़ा किया है मुस्लिम मुल्कों पर अपनि हुकमरानी क़ायम कि है और कमज़ोर मुस‌लमानों पर जो जुल्म‌ ढाए जा रहे हैं, इन तमाम के लिए पुरी उम्मत कि ज़िम्मेदारी है। आज हमारे लिए ये गुंजाइश बाक़ी नहीं रही कि हम ये कहीं कि अल्लाह ताला अपने बंदों और मुक़ामात मुक़द्दसा की हिफ़ाज़त करेगा बल्कि हमें क़ुरान और हदिस रसूल स.व. पर अमल करते हुए एकता के ज़रीये इस्लाम के दुशमनों का एक होकर‌ मुक़ाबला करना होगा। तब ही हमें कामयाबी मिलेगी।

प्रोफेसर शेख़ अबू मुहम्मद अलहमोदीने जो अल-क़ूदस यूनीवर्सिटी के फ़ारिगुत्तहसील हैं, जुनूबी अफ़्रीक़ा, बर्तानिया और अरब मुल्कों के अक्सर दौरा करते रहते हैं। मुस‌लमानों पर इस्लामी हुकूमत इस्लामी हुकमरानी और ख़िलाफ़त को क़ायम करने के लिए आगे आने बार बार ज़ोर दिया और कहा कि दुनिया में ख़िलाफ़त के ज़रीये इस्लामी निज़ाम क़ायम करना सारी उम्मत की ज़िम्मेदारी है।

शुरु में सय्यद वक़ार उद्दीन कादरी चीफ़ एडीटर रहनुमा ए दक्कन ने मस्जिद अकसा पर यहूदीयों के जाबिराना क़बजे के बारे में तफ़सील से वाक़िफ़ करवाया और शेख़ अलहमोदी का तआरुफ़(परीचय) भी करवाया। शेख़ अलहमोदी ने शुक्रवार कि नमाज़ भि पढाइ। नमाज पढने वालों से खचाखच भरी इस मस्जिद में इस वक़्त रक्त तारी होगई जब शेख़ ने आलम इस्लाम की तरक़्क़ी-ओ-ख़ुशहाली उम्मत में इत्तिहाद फ़लस्तीन की आज़ादी और दुश्मनों के कबजे वाले मुस्लिम मुल्कों की आज़ादी के लिए दिल को रुलाने वाली दुआ की। आख़िर में डाक्टर मुहम्मद मंज़ूर हुसैन ख़तीब और इमाम मस्जिद रहमत आलम ने शुक्रिया अदा किया।

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