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मस्जिद फूलबाग में अजमेर शरीफ़ के जन्नती दरवाज़ा की ज़ियारत का आग़ाज़

हैदराबाद 18 मई : आसिफ़ जाहि हुक्मरानों से लेकर हिंदुस्तान के दीगर अवाम की तरह हैदराबाद दक्कन में सुल्तानुल हिंद हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी अल मारूफ़ ख़्वाजा गरीब नवाज़ (रह) के चाहने वाले पाए जाते हैं । वैसे भी सरज़मीन

हैदराबाद 18 मई : आसिफ़ जाहि हुक्मरानों से लेकर हिंदुस्तान के दीगर अवाम की तरह हैदराबाद दक्कन में सुल्तानुल हिंद हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी अल मारूफ़ ख़्वाजा गरीब नवाज़ (रह) के चाहने वाले पाए जाते हैं । वैसे भी सरज़मीने दक्कन बिलख़ुसूस शहर हैदराबाद को इस बात का एज़ाज़ हासिल है कि यहां अल्लाह अज़्ज़ो वजल के कई महबूब बंदे आराम फ़र्मा हैं।

हुज़ूर ख़्वाजा गरीब नवाज़ (रह) के चाहने वाले और आप के मोतक़दीन हिंदुस्तान के चप्पा चप्पा में मिलेंगे लेकिन हैदराबाद में शाहों से लेकर गरीब अवाम हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ से बहुत ज़्यादा अक़ीदत रखती है।

आसिफ़ जाहि हुक्मरानों की हज़रत ख़्वाजा गरीब से अक़ीदत और मुहब्बत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उर्स हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ के मौक़ा पर हर साल सरकारी सतह पर चादर रवाना की जाती थी जब कि अवाम के सैंकड़ों क़ाफ़िले भी मज़ार ख़्वाजा (रह) पर हाज़िरी के लिए अजमेर शरीफ़ का रुख़ करते थे।

अजमेर में निज़ाम दरवाज़ा दक्कन के हुक्मरानों की गरीब नवाज़ (रह) से मुहब्बत का मुँह बोलता सबूत है । बहुत कम लोग इस बात से वाक़िफ़ हैं कि नवाब मीर महबूब अली ख़ांन बहादुर ने अपने वज़ीर आज़म महाराजा किशन प्रशाद को अजमेर शरीफ़ रवाना करते हुए दरगाह में मौजूद जन्नती दरवाज़ा ले आने की हिदायत दी । इत्तिफ़ाक़ से उस वक़्त दरगाह शरीफ़ में तामीरी काम जारी था।

चुनांचे चांदी के दरवाज़ा और कसीर नज़राना पेश करते हुए लक्कड़ी का जन्नती दरवाज़ा हासिल कर लिया गया इस तरह ख़्वाजा गरीब नवाज़ के दरबार में मौजूदा जन्नती दरवाज़े की हैदराबाद मुंतक़ली अमल में आई। इस दरवाज़ा को अजमेर से सीधे लाल दरवाज़ा में वाक़े मस्जिद फूलबाग मुंतक़िल किया गया और महबूब अली बाशाह ने दरवाज़ा को रखने के लिए एक ख़ूबसूरत चोखंडी तामीर करवाई।

अगरचे 90 के दही तक लाल दरवाज़ा में अच्छी ख़ासी तादाद में मुसलमान मुक़ीम थे लेकिन अब वहां मुस्लिम आबादी नहीं है बल्कि मस्जिद हिंदु आबादी में घिरी हुई है इस मस्जिद में चार बुज़ुर्गों की मज़ारात भी हैं । मस्जिद फूलबाग मौक़ूफ़ा है और इस के तहत वक़्फ़ रेकॉर्ड के मुताबिक़ 11646 मुरब्बा गज़ अराज़ी है जिस की तफ़सीलात इस तरह हैं।

हैदराबाद 1824/ मस्जिद फूलबाग बैरून अली आबाद इस नंबर 127 , वार्ड 18 गज़्ट 20A सिरयल नंबर 1970 । सियासत ने गुजिश्ता साल जून में मस्जिद फूलबाग में मौजूद दरगाह हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ (रह) के जन्नती दरवाज़ा के बारे में रिपोर्ट शाय की थी जिस के बाद शहरियों की एक कसीर तादाद ने वहां पहूँचकर उस की ज़ियारत की।

आप को बतादें कि ये इस दरवाज़ा के इव्ज़ नवाब महबूब अली बाशाह ने जो तारीख़ी दरवाज़ा नस्ब करवाया था उस वक़्त इस पर 55857 रुपये के मसारिफ़ आए थे।

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