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मस्जिद मुस्तफ़ा ख़ां नया क़िला गोलकुंडा का तहफ़्फ़ुज़ हर मुस्लमान का दीनी फ़रीज़ा

नुमाइंदा ख़ुसूसी-आंधरा प्रदेश हाईकोर्ट में रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड ने अर्ज़ी दी है कि वो मुताल्लिक़ा ओहदेदारों को हिदायत दे कर केमीकल या कीमीयाई टेस्ट के लिए ज़रूरी हिदायत जारी करे । वक़्फ़ बोर्ड ने ये दरख़ास्त हाईकोर्ट में इस

नुमाइंदा ख़ुसूसी-आंधरा प्रदेश हाईकोर्ट में रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड ने अर्ज़ी दी है कि वो मुताल्लिक़ा ओहदेदारों को हिदायत दे कर केमीकल या कीमीयाई टेस्ट के लिए ज़रूरी हिदायत जारी करे । वक़्फ़ बोर्ड ने ये दरख़ास्त हाईकोर्ट में इस लिए दी थी नया क़िला में वाक़ई तारीख़ी मस्जिद मुस्तफ़ा ख़ां के अतराफ़-ओ-अकनाफ़ में कोई क़ब्रिस्तान था या नहीं । मुस्तफ़ा ख़ां मस्जिद के बारे में एक रिपोर्ट अख़बार सियासत में शाय की गई थी ।

मालूम हुआ है कि हैदराबाद गोल्फ एसोसी ऐस HGA के अरकान ने जिन की एक एसोसी ऐष्ण भी है । वक़्फ़ बोर्ड से रब्त पैदा किया है और कहा है कि वो क़ब्रिस्तान की मौजूदगी या अदमे मौजूदगी के बारे में अपनी छानबीन इस एरिया या इलाक़ा तक महिदूद रखे जिस को मस्जिद के लिए नोटी फ़ाई किया गया था । यानी एसोसी ऐष्ण का कहना है कि वक़्फ़ बोर्ड सारे इलाक़ा के बारे में केमीकल छानबीन ना करवाए लेकिन अभी तक मिलने वाली इत्तिला के बमूजब वक़्फ़ बोर्ड ने अपना अटल मौक़िफ़ बरक़रार रखा है और सारे इलाक़ा का Soil टेस्ट के लिए बोर्ड का बिलकुल बजा और दरुस्त इसरार है क्यों कि इख़लास नीयत से कोशिश करे तो बोर्ड इस बेशक़ीमत ज़मीन को हासिल करसकता है क्यों कि ये उस की मिल्कियत है यहां एक क़ब्रिस्तान हुआ करता था ।

गोल्फ एसोसी ऐष्ण की तामीर के दौरान कितनी ही क़ब्रें मिस्मार करदी गईं कितने ही बुज़ुर्गों का नाम-ओ-निशान मिटा दिया गया । ये अराज़ीक़ब्रिस्तान के लिए थी और इसी मक़सद के लिए बाक़ी रहना चाहीए अगरचे के इस ज़मीन को नोटी फ़ाई नहीं किया गया है ताहम रिकार्ड के लिहाज़ से इस के क़ब्रिस्तान होने केनाक़ाबिल तरदीद सबूत मौजूद हैं । इस से कुछ ही दिन क़बल वक़्फ़ बोर्ड ने नया क़िलाइलाक़ा का जहां मस्जिद मुस्तफ़ा ख़ां है सर्वे किया था जिस का सर्वे नंबर 40 है । ये इस लिए भी ज़रूरी था कि ख़ुद हाईकोर्ट ने हिदायत दी थी । हाईकोर्ट ने एक हुक्मनामा 2 नवंबर को जारी किया था और वक़्फ़ बोर्ड को हिदायत की थी कि वो अपनी ज़मीन की निशानदेही करे और इस को मुतय्यन करे ।

इस काम के सिलसिला में आरक्योलोजीकल सर्वे आफ़ इंडिया के साथ तआवुन करने की भी अदालत ने हिदायत दी थी । जवाइंट कुलैक्टर के पास जो सर्वे रिपोर्ट पेश की गई थी इस में वक़्फ़ बोर्ड ने कहा था अपने दावा के बावजूद इस इलाक़ा में कोई सियोल वर्क नहीं होरहा है बल्कि ये कहा गया कि सिर्फ ज़मीन की सतह को बराबर किया जा रहा है और इस के लिए हैवी मिशनरी इस्तिमाल की जा रही है । गोल्फ एसोसी ऐष्ण ने इस काम के दौरान एक तारीख़ी कुँआं भी बर्बाद कर डाला एक नहर को भी ख़तम करदिया जिस से मस्जिद को पानी सरबराह किया जाता था । रिपोर्ट में कहा गया कि सर्वे नंबर 40 तक़रीबन 28 एकड़ पर मुहीत है ।

ये भी कहा गया था कि मस्जिद की तामीर का इलाक़ा वक़्फ़ बोर्ड के रिकार्ड के मुताबिक़ 1632 मुरब्बा गज़है जब कि नोटी फाइड एरिया 4589.3 मुरब्बा गज़ है रिपोर्ट के बमूजब काम के दौरान क़दीम क़ब्रों के कोई निशान नहीं पाए गए इसी लिए अदालत से मुतालिबा किया गया कि इस इलाक़ा की ज़मीन का कीमीयाई तजज़िया किया जाय जो सर्वे नंबर 40 में है जिस के लिए जदीद तरीन टैक्नालोजी और आलात इस्तिमाल किए जा सकते हैं । वक़्फ़ बोर्ड के सदर नशीन मौलाना ग़ुलाम अफ़ज़ल ब्याबानी ने कहा कि अगर ज़मीन के कीमीयाई तजज़िया से पता चल गया कि यहां क़ब्रिस्तान था तो फिर सर्वे नंबर 40 के तेहत का सारा इलाक़ा वक़्फ़ बोर्ड की मिल्कियत बन जाएगा ।

उन्हों ने कहा कि अगर ज़मीन का कुछ हिस्सा भी अगर वक़्फ़ बोर्ड में आशूर ख़ाना , मस्जिद , दरगाह , छल्ला के लिए इस्तिमाल हो तो ये अराज़ी वक़्फ़ बोर्ड की मिल्कियत बन जाती है ये वक़्फ़ बोर्ड की तमाम जायदादों के लिए यकसाँ क़ानून है । वक़्फ़ बोर्ड का मौक़िफ़ दरुस्त है ।इस के इलावा मुस्लिम तंज़ीमें , इदारे और मिल्लत दोस्त अहबाब भी अब इस मसला से दिलचस्पी ले रही हैं जो ख़ुश आइंद बात है । मिल्लत की अमानतों की हिफ़ाज़त हम सब की इजतिमाई ज़िम्मेदारी है । हम एक ताक़त बन सकते हैं । ओक़ाफ़ी जायदादों की हिफ़ाज़त के लिए हम को कमर बस्ता होजाना चाहीए ।।

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