Friday , December 15 2017

मस्जिद में मुनशियात के आदी अफ़राद का ईलाज

मलेशया की अल रहमान मस्जिद में मुनशियात (नशा करने वाले/ नसेड़ी) के आदी अफ़राद का ईलाज तमाम तर मुख़ालिफ़त के बावजूद मिसाल बन गया है। आलमी इदारा बराए सेहत के मुताबिक़ अल रहमान मस्जिद दुनिया की पहली मस्जिद है जहां मुनश्शियात के आदी अफ़राद

मलेशया की अल रहमान मस्जिद में मुनशियात (नशा करने वाले/ नसेड़ी) के आदी अफ़राद का ईलाज तमाम तर मुख़ालिफ़त के बावजूद मिसाल बन गया है। आलमी इदारा बराए सेहत के मुताबिक़ अल रहमान मस्जिद दुनिया की पहली मस्जिद है जहां मुनश्शियात के आदी अफ़राद की रुहानी-ओ-नफ़सियाती इस्लाह के साथ बा क़ायदा ईलाज किया जा रहा है।

मस्जिद में एक क्लीनिक क़ायम किया गया है जहां से हीरोइन और दूसरे नशे के आदी अफ़राद का मेथा डोन नामी दवा से ईलाज किया जाता है। मस्जिद में गुज़शता दो साल से मेथा डोन क्लीनिक कामयाबी से काम कर रहा है जिस को यूनीवर्सिटी आफ़ मलेशिया का शोबा एडेक्शन साईंस चला रहा है और मुताल्लिक़ा शोबा के मुताबिक़ अल रहमान मस्जिद के तजुर्बे को मद्द-ए-नज़र रखते हुए वो 2015 तक मुल़्क की 600 मसाजिद में मीथाडोन क्लीनिक क़ायम करेंगे।

जिन से 72 हज़ार मुनश्शियात के आदी अफ़राद इस्तेफ़ादा कर सकेंगे। यूनीवर्सिटी का मज़कूरा शोबा अपने प्रोग्राम को चर्चों और मंदिरों तक फैलाने का मंसूबा रखता है और इस के लिए कुवाला लुमपुर के मुज़ाफ़ात में बाटू नामी मंदिर में क्लीनिक बना दिया गया है। यूनीवर्सिटी मुताल्लिक़ा शोबा को हुकूमती शोबा इस्लामी डेवलपमेन्ट का भी तआवुन हासिल है। मसाजिद में क़ायम क्लीनिकों में मुनश्शियात के आदी अफ़राद तौबा के जज़बे के साथ अपनी रजामंदी से रुजू करते हैं।

TOPPOPULARRECENT