Wednesday , December 13 2017

महाराष्ट्र: फडणवीस की हुकूमत ने रद्द किया मुस्लिम रिजर्वेशन

महाराष्ट्र में पिछडे हुए मुसलमानों के लिए तालीम के सूबे में पांच फीसदी रिजर्वेशन खत्म हो गया है। रियासत की भाजपा-शिवसेना इत्तेहाअद की हुकूमत ने मुस्लिम रिजर्वेशन रद्द किए जाने को लेकर बुध के रोज़ आर्डिनेंस जारी कर दिया है।

महाराष्ट्र में पिछडे हुए मुसलमानों के लिए तालीम के सूबे में पांच फीसदी रिजर्वेशन खत्म हो गया है। रियासत की भाजपा-शिवसेना इत्तेहाअद की हुकूमत ने मुस्लिम रिजर्वेशन रद्द किए जाने को लेकर बुध के रोज़ आर्डिनेंस जारी कर दिया है।

गुजश्ता कांग्रेस-राकांपा सरकार ने 2014 में स्पेशल आर्डिनेंस के जरिए महाराष्ट्र में मराठा समाज के लिए 16 फीसदी और मुसलमानों के लिए पांच फीसदी रिजर्वेशन लागू किया था। यह रिजर्वेशन तालीम के साथ सरकारी नौकरियों में भी लागू होना था।

उस वक्त की कांग्रेस-राकांपा हुकूमत ने रिजर्वेशन लागू करने के वक्त दावा किया था कि मराठा और मुसलमानों के पिछडेपन को खत्म करने के लिए यह रिजर्वेशन दिया जा रहा है। इसके खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट में एक मुफाद ए आम्मा की दरखास्त याचिका दायर की गई थी।

इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 14 नवंबर, 2014 को अपने हुक्म में सरल सेवा भर्ती में पांच फीसदी रिजर्वेशन पर मुअत्तली (suspension) दे दिया था। यह आर्डिनेंस कानून में तब्दील न होने से 23 दिसंबर, 2014 को यह आर्डिनेंस लैप्स हो गया। जीआर के ज़रिये से रिजर्वेशन को लेकर 24 जुलाई के इक्तेदार के फैसले को रद्द किया जा रहा है।

सहाफी केतन तिरोडकर समेत दूसरे लोगों ने इस नए रिजर्वेशन का एहतिजाज किया था और बॉम्बे हाईकोर्ट में इसे रद्द करने के लिए दरखास्त पेश की थी। मराठा और मुस्लिम रिजर्वेशन का एहतिजाज करने वालों का दावा था कि इस नए 21 फीसदी रिजर्वेशन से महाराष्ट्र में कुल रिजर्वेशन 74 फीसदी तक जा रहा है जो कि गैर‍ आईनी है।

महाराष्ट्र में 52 फीसदी रिजर्वेशन पहले से चला आ रहा है। इसी के साथ रिजर्वेशन को हटाने की मांग करते हुए यह भी कहा गया कि मराठा वर्ग पिछडा नहीं है।

मराठा, महाराष्ट्र की हुक्मरान जमात है, जो चातुर्वण्र्य में क्षत्रियों के जुमरे में गिनी जाती है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन दावों को कुबूल करते हुए मराठा और मुस्लिम रिजर्वेशन कानून को खारिज करते हुए महाराष्ट्र में मुसलमानों को सिर्फ तालीम में पांच फीसदी रिजर्वेशन जारी रखने को मंजूरी दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को कायम रखा। ऐसे में बढते सियासी दबाव के बाद फडणवीस सरकार को कानूनी सलाह के मुताबिक बिल के जरिए दोबारा रिजर्वेशन लागू करने की मशक्कत करनी पडी। लेकिन इस बिल के मसौदे से मुस्लिम रिजर्वेशन की बात हटा दी गई है।

इस फैसले का ऐलान होते ही राकांपा विधानमंडल के नागपुर में चल रहे सरमाई इजलास का माहौल गर्मा गया है। रियासती हुकूमत के इस फैसले का कांग्रेस और राकांपा समेत मुस्लिम लीडरों ने मुस्लिम मुखालिफ फैसला बताया है।

कांगस के साबिक वज़ीर नितिन राउत, कांग्रेस लीडर हुसैन किदवई, राकांपा के क़ौमी तरजुमान नवाब मलिक और एमआईएम के एमएलए इम्तियाज अली ने कहा कि रियासत की हुकूमत का यह फैसला मुसलमानों के खिलाफ है। राकांपा एमएलए अजित पवार ने इस पर ऐतराज़ उठाते हुए कहा है कि भाजपा की सरकार संघ के एजेंडे पर काम कर रही है।

उसके इस फैसले से मआशरे में दरार पैदा होगी। महाराष्ट्र के वज़ीर ए आला देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले पर खुलकर तो कुछ नहीं बोला, लेकिन जाते-जाते वह यह कह गए कि गुजश्ता हुकूमत का किया हुआ मुस्लिम रिजर्वेशन मौजूदा फायनेंशियल ईयर , यानि 31 आर्च 2015 तक जारी होगा।

फिलहाल, भाजपा सरकार के लिए सेशन के आखिरी दिन विधान-परिषद में Reservation Bill law को मंजूर कराना एक चुनौती होगी, क्योंकि, इस ऊपरी सदन में रियासत की हुकूमत के पास अक्सरियत नहीं है।

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