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महाराष्ट्र में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की जासूसी करने के लिए पुलिस का इस्तेमाल

मुंबई: मुख्यमंत्री महाराष्ट्र देवेन्द्र फडणवीस की आभरकयादत गृह विभाग की आलोचना करते हुए शिवसेना ने आज कहा है कि पुलिस का काम महज राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और अपने ही लोगों पर निगरानी रखने के अलावा भी बहुत कुछ है। पार्टी प्रवक्ता ‘सामना’ के संपादकीय में लिखा विश्लेषण करते हुए कहा गया है कि पुलिस की जिम्मेदारी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और अपने ही लोगों (भाजपा नेताओं) पर निगरानी तक सीमित कर दिया गया है। भाजपा की सहयोगी पार्टी ने एक पुलिसकर्मी की मौत का हवाला दिया जिस पर ड्यूटी के दौरान हमला किया गया था। अगर पुलिस कर्मचारियों पर इस तरह के हमले जारी रहेंगे तो उन्हें हेलमेट के बजाय हथियार प्रदान किए जाएं।

शिवसेना ने कहा कि महलूक पुलिसकर्मियों को महज शहीद का दर्जा देकर खाकी वर्दी की प्रतिष्ठा को बेहतर नहीं बनाया जा सकता क्योंकि पुलिस बल में नैतिक गिरावट और राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ गया है। इन सभी घटनाओं को देखने के बाद गृहमंत्री के रूप में दिवंगत बालासाहेब देसाई सेवाओं याद आती हैं। पिछले कुछ साल से गृह विभाग केवल चुनिंदा अधिकारियों के विकास (प्रमोशन) और तक़र्रुत तक सीमित रह गया है।

शिवसेना की यह आलोचना ऐसे समय आई है जब विपक्षी नेता राधा कृष्णा विखे पाटिल ने यह मांग किया कि राज्य में एक पूर्णकालिक गृहमंत्री की जरूरत है। कानून व्यवस्था की समस्या नहीं है कि साप्ताहिक पंद्रह दिन में निपट लिया जाए जबकि गृह विभाग प्रदर्शन की समीक्षा के लिए फडणवीस पास पर्याप्त समय नहीं है। उन्हें चाहिए कि राज्य के हित में एक पूर्णकालिक गृहमंत्री नियुक्त करें।

उन्होंने बताया कि जनवरी 2015 ताकि जून 2016 राज्य में 6,226 बलात्कार, 17,234 छेड़छाड़ की घटनाओं, 3,771 हत्या की वारदातें पेश आई हैं जिससे यह साबित होता है कि फडणवीस एक असफल गृहमंत्री बन गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता नारायण राणे ने भी कहा कि फडणवीस ने कानून व्यवस्था की स्थिति को पुलिस अधिकारियों की दया पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि कोपार्डी सामूहिक बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध राजनीतिक संरक्षण के बिना अंजाम नहीं दिया जा जबकि मुख्यमंत्री दिल्ली से अपने आकाओं के इशारे पर भाषण करने, सेमिनारों का उद्घाटन और फ़ाइलों की एकाग्रता में व्यस्त हैं।

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