Sunday , September 23 2018

महेश कुमार सस्पेंड, बंसल पर इस्तीफे का दबाव

नई दिल्ली, 05 मई: रेलवे में प्रमोशन के लिए करोड़ों की घूसखोरी में रेलवे के वज़ीर के भांजे की गिरफ्तारी के बाद हफ्ते के दिन कांग्रेस ने पवन बंसल के इस्तीफे से इंकार कर दिया।

नई दिल्ली, 05 मई: रेलवे में प्रमोशन के लिए करोड़ों की घूसखोरी में रेलवे के वज़ीर के भांजे की गिरफ्तारी के बाद हफ्ते के दिन कांग्रेस ने पवन बंसल के इस्तीफे से इंकार कर दिया।

अपोजिशन की इस मांग को दरकिनार करते हुए हुकूमत भी पूरी तरह बंसल के साथ दिखी। इस बीच मामले में गिरफ्तार रेलवे बोर्ड के मेम्बर महेश कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है।

घूसकांड को लेकर बीजेपी समेत अपोजिशन पार्टियो ने रेल मंत्री पवन बंसल के इस्तीफे की मांग को तेज करते हुए यूपीए हुकूमत पर हमला तेज कर दिया है।

बीजेपी ने यूपीए हुकूमत को दलालों, सौदागरों की ऐसी हुकूमत तक करार दे दिया, जहां हर फैसला बिकता है।

मगर बंसल की रुखसती के बाद सीधा हुकूमत की गर्दन पर तलवार लटकने के डर से कांग्रेस और यूपीए हुकूमत बंसल की कुर्सी को मजबूरी में बचाने की कोशिश में जुट गई है।

ज़राए ने कहा कि कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक आज भी होगी। ऐसे में पीर के दिन पार्लियामेंट के इजलास से पहले एतवार को बंसल पर कोई अहम फैसला लिया जा सकता है।

हफ्ते के दिन इजलास में बंसल को भी बुलाया गया था। सीनीयर लीडरों ने बंसल से जवाब तलब किया। वहीं बंसल ने इस मामले में अपने किरदार को लेकर इंकार किया। ज़राए के मुताबिक पीएम और सोनिया ने अलग से बंसल से बातचीत कर वजाहत तलब किया।

बताया जाता है कि बंसल ने बचाव में कहा कि प्रमोशन या तकर्रुरी को लेकर भांजे विजय सिंगला से उनकी कोई बात नहीं हुई है।

बल्कि उन्होंने यहां तक दावा किया कि अपने भांजे से पिछले कुछ दिनो से बात भी नहीं हुई है। समझा जाता है कि बंसल के पुराने गैर मुतानाज़ा ट्रैक रिकार्ड और उनके दावों के साथ-साथ अपनी सियासत बचाने के लिए कांग्रेस हाईकमान फिलहाल रेलमंत्री के साथ है।

बंसल ने इससे पहले वज़ीर ए आज़म से मुलाकात कर अख़लाक़ की बुनियाद पर इस्तीफे की पेशकश की। तकरीबन 40 मिनट की बातचीत में बंसल ने इस मामले में खुद के शामिल नहीं होने को लेकर सफाई भी दी। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की।

बल्कि इससे पहले उन्होंने एक बयान के जरिए खुद को इस वाकिया से अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि सिंगला करीबी रिश्तेदार हैं लेकिन वह या मेरे दूसरे रिश्तेदार मेरे सरकारी कामकाज में कोई दखल नहीं देते हैं और न ही वे ऐसा कर सकते हैं। न ही वे मेरे फैसले को मुतास्सिर कर सकते हैं। मेरे खानदान और सिंगला के बीच कोई कारोबारी रिश्ते भी नहीं हैं।

हालांकि रेल मंत्री की सफाई को खारिज करते हुए अपोजिशन ने उन्हें तुरंत हटाने की मांग की है। वहीं, बंसल के बचाव में उतरी कांग्रेस ने अपोजिशन पर ही हमला बोल दिया। कांग्रेस सेक्रेटरी जनार्दन द्विवेदी ने बीजेपी पर यह कहते हुए जवाब दिया कि कुछ लोगों को इस्तीफा मांगने की बीमारी लग गयी है।

पार्टी के इस बयान से रेल मंत्री को फिलहाल राहत तो मिली है। लेकिन रेल मंत्री की कुर्सी पर खतरे के बादल अभी छटे नहीं हैं। माना जा रहा है कि दबाव बढ़ने पर हुकूमत को कुछ कदम कदम उठाना पड़ सकता है।

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