Friday , January 19 2018

माँ और भाभी के रोल करना नहीं चाहती : लीना चंदावरकर

मन का मय्यत, मेहबूब की मेहंदी, हमजोली, मैं सुंदर हूँ, बैराग और रखवाला जैसी कई मशहूर और हिट फिल्मों की हीरोइन लीना चंदावरकर ने कुछ अर्सा क़बल अपने बेटे समेत कुमार के साथ एक फ़िल्मी तक़रीब ( सामारोह) में शिरकत की थी जहां हसब-ए-मामूल मीड

मन का मय्यत, मेहबूब की मेहंदी, हमजोली, मैं सुंदर हूँ, बैराग और रखवाला जैसी कई मशहूर और हिट फिल्मों की हीरोइन लीना चंदावरकर ने कुछ अर्सा क़बल अपने बेटे समेत कुमार के साथ एक फ़िल्मी तक़रीब ( सामारोह) में शिरकत की थी जहां हसब-ए-मामूल मीडीया ने इन का तआक़ुब किया और बिलआख़िर उन्हे लब कुशाई के लिए मजबूर किया।

ये पूछे जाने पर की वो फिल्मों में अगर दुबारा आना चाहें तो उन्हें हाथों हाथ लिया जा सकता है लेकिन वो क्यों आना नहीं चाहतीं, जिस का जवाब उन्हों ने मुस्कुराते हुए दे कर कहा कि में अगर आ भी जाऊं तो हीरोइन नहीं बन सकती। आज ज़माना कटरीना, विद्या, करीना और दिपीका का है। भाभी और माँ के रोल मैं करना नहीं चाहती।

उन्होंने कहा की दिलीप साहब के साथ फ़िल्म बैराग में काम करके उनकी देरीना (पुरानी) आरज़ू पूरी हो गई। इस के बाद नागुज़ीर हालात में किशोर कुमार से शादी के बाद उन्होंने फिल्मों से सन्यास ले लिया था क्योंकि समित कुमार की पैदाइश और फिर उन की परवरिश के लिए वक़्त देना ज़रूरी था।

किशोर जी के साथ फ़िल्मी तक़ारीब ( सामारोह) और रिकार्डिंग के लिए अक्सर जाया करती थी और कभी कभी किशोर जी के बड़े बेटे अमीत कुमार (जो उन की पहली बीवी रोमा से है) के साथ भी पिकनिक वग़ैरा का प्रोग्राम बनता था जिस में दादा मुनी (अशोक कुमार) भी शामिल होते थे। किशोर जी की मौत के बाद उन्होंने फ़िल्मी दुनिया को हमेशा के लिए ख़ैरबाद कह दिया और अब ज़्यादा तर वो अपने मकान में ही ख़ातून-ए-ख़ाना (धर्म पत्नी, गृहिणी) के फ़राइज़ अंजाम देती हैं।

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